फ्रांस को अपना सबसे युवा राष्ट्रपति मिल चुका है। 39 साल के इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को फ्रांस के राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली है। शपथ लेने से ठीक पहले मैक्रों ने सिलसिलेवार कई ट्वीट किये। उन्होंने लिखा, ''फ्रांसीसी गणतंत्र एक नई लोकतांत्रिक जीवनशक्ति और खुद में नवीनीकरण का अनुभव कर रहा है।
नागरिकों की आवाज और उनके विचारों को मैं तरजीह दूंगा। उन्हें सुनूंगा। हमें दुनिया को दिखाना होगा कि फ्रांसीसी नौजवान योग्य हैं। मैं आज शाम से दफ्तर संभालूंगा। मैं अपने प्रयासों और आप लोगों के साथ मिलकर, एक अंतरंग निश्चिंतता के साथ देश का खूबसूरत इतिहास लिखूंगा।''
फ्रांस चुनाव-2017 में मैक्रों को 66.06 फीसदी वोट मिले हैं। जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी धुर दक्षिणपंथी नेता मरी ल पेन को इस चुनाव में 33.94 फीसदी वोट मिले।
फ्रांसीसी गणतंत्र में 1958 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि चुना गया राष्ट्रपति फ्रांस के दो प्रमुख राजनीतिक दलों- सोशलिस्ट और सेंटर राइट रिपब्लिकन पार्टी से नहीं हैं।
रविवार को शपथ लेने के बाद अपने भाषण में मैक्रों ने कहा, "दशकों से फ्रांस ने खुद पर शक किया। फ्रांस ने जो सीखा है, दुनिया को उसकी जरूरत है। दुनिया और यूरोप को फ्रांस की आज सबसे ज्यादा जरूरत है।''
मैक्रों ने कहा, "मुझे मिले बहुमत से फ्रांस के लोगों को खुद पर यकीन लौटेगा। फ्रांस की ताकत अभी खारिज नहीं हुई है। हम एक महान नए युग की कगार पर हैं।" फ्रांस का प्रधानमंत्री कौन होगा, इसका ऐलान मैक्रों सोमवार को कर सकते हैं।
फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने सत्ता की कमान मैक्रों को सौंपने के बाद ट्वीट के जरिए एक संदेश दिया है। जिस वक्त मैक्रों फ्रांस के भविष्य पर भाषण दे रहे थे, ओलांद ने ट्विटर पर लिखा, "फ्रांस की जिम्मेदारी बेहद भारी थी। लेकिन हमने इसे बखूबी निभाया। इस पर हमें गर्व है।
चाहें वो ग्रीस को यूरोप में रखने का फैसला हो, क्लाइमेट चेंज की डील हो या फिर चुनौतीपूर्ण वक्त से फ्रांस को निकालने की जिम्मेदारी हो। बहरहाल, मैकों का भाषण दर्शाता है कि वो फ्रांस को दूसरे देशों के लिए एक उदाहरण बनाना चाहते हैं। यह देखकर मुझे अच्छा लगता है कि मैंने देश को बेहतर स्थिति में छोड़ा है।"