फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फ्रांस के सबसे युवा राष्ट्रपति बने इमैनुएल मैक्रों, PM मोदी ने दी बधाई

Mon, 08 May 2017 11:35 AM IST
एजेंसी/ पेरिस
विज्ञापन
विज्ञापन
यूरोपीय संघ के समर्थक और मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के ऐतिहासिक राष्ट्रपति चुनाव को जीतकर सबसे युवा राष्ट्रपति बन गए हैं। मैक्रो की जीत पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया है। पीएम ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उम्मीद की जाती है कि भारत-फ्रांस के रिश्तों में मजबूती आएगी।
विज्ञापन

  Congratulations to @EmmanuelMacron for an emphatic victory in the French Presidential election. #Presidentielle2017 — Narendra Modi (@narendramodi) May 8, 2017

  I look forward to working closely with President-elect @EmmanuelMacron to further strengthen India-France ties. — Narendra Modi (@narendramodi) May 8, 2017
विज्ञापन



इस जीत के साथ ही 39 वर्षीय पूर्व बैंकर मैक्रों ने अपने चुनाव प्रचार में वादा किया था कि वह देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करेंगे। आंकड़े बताते हैं कि मैक्रों ने 65.5 फीसदी से 66.1 फीसदी बैलट समर्थन से जीत दर्ज की है जबकि ली पेन को 33.9 फीसदी से 34.5 फीसदी का बैलट समर्थन ही मिल पाया। तीन साल पहले तक कोई नहीं जानता था कि मैक्रों यूरोप के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हो जाएंगे। 

मैक्रों ने फ्रांस एवं यूरोएजेंसी/ पेरिसपीय संघ के लिए उसी समय से अपना राजनीतिक और आर्थिक सुधार का महत्वाकांक्षी एजेंडा शुरू कर दिया था। इस परिणाम का पूरी दुनिया खासकर ब्रुसेल्स और बर्लिन के नेताओं के लिए दूरगामी असर होगा क्योंकि ली पेन ईयू विरोधी और वैश्वीकरण विरोधी कार्यक्रम से ये नेता घबराए हुए थे।

चुनाव प्रचार के दौरान धुर दक्षिणपंथी ली पेन ने मैक्रों को मुक्त व्यापार तथा प्रवासियों का हिमायती बताते हुए‘ग्लोबलिस्ट’ करार दिया था। इमैनुएल मैक्रों एक साल पहले बनी ‘एन मार्क’ पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, वहीं ली पेन ‘नेशनल फ्रंट’ पार्टी की उम्मीदवार थीं।
विज्ञापन

मैक्रों के सामने अब घरेलू एजेंडे को लागू करने की चुनौती

​गौरतलब है कि मैक्रों पहले चरण से ही आगे चल रहे थे और वे सभी सर्वेक्षणों में भी बढ़त बनाए हुए थे। मैक्रों के सामने अब सरकारी खर्च घटाने, श्रम कानून सरल बनाने, उपेक्षित क्षेत्रों में शिक्षा पर जोर देने और स्वरोजगार के लिए नई सुरक्षा नीति लागू करने जैसे घरेलू एजेंडे को लागू करने की चुनौती होगी।

बुधवार रात को दोनों नेताओं के बीच हुई बहस में ने पेन ने कहा था कि फ्रांस के लोग अपनी राजनीतिक पसंद साफ करने जा रहे हैं। हालांकि शुक्रवार को प्रकाशित पांच चुनाव सर्वेक्षणों में पहले ही मैक्रों को 62-63 फीसदी वोट हासिल कर बढ़त बनाते हुए दिखाया गया था।

फ्रांस में हुए इस बार के चुनावों ने सभी मिथकों को तोड़ दिया। चुनाव से पहले वहां पर हुए स्कैंडल ने लोगों को लगातार चौंकाया। वहीं अंतिम समय में 39 वर्षीय राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मैक्रों के चुनावी अभियान को हैक कर लीक कर दिया गया। मैक्रॉन ने इससे पहले किसी भी चुनाव में भाग नहीं लिया था। 

चुनाव में यूरोपीय संघ और व्यापार के समर्थक मैक्रों प्रवासी और यूरोपीय संघ विरोधी ली पेन के खिलाफ खड़े थे। पश्चिमी लोकतंत्र में एक-दूसरे की धुर विरोधी विचारधारा की इन दोनों हस्तियों ने वहां की मुख्य पार्टियों को पहले ही दौर में बाहर कर दिया था। 48 वर्षीय ली पेन मजबूत सीमाओं और राष्ट्रवाद का चेहरा थीं वहीं मैक्रों मुक्त व्यापार, प्रवास और साझा संप्रभुता के समर्थक के रूप में सामने आए थे।


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें