सविता के पिता अनदंप्पा का कहना है कि 'मुझे उम्मीद है कि आयरलैंड के लोग जनमत संग्रह के दिन मेरी बेटी सविता को याद रखेंगे और जो उसके साथ घटित हुआ ऐसा किसी अन्य परिवार के साथ नहीं होना चाहिए।' सविता के पिता ने कर्नाटक के अपने घर से फोन पर द गार्डियन को बताया कि 'मैं उसके बारे में हर दिन सोचता हूं। 8वें संशोधन के कारण मेरी बेटी को चिकित्सा उपचार नहीं मिला। उन्हें कानून बदलना होगा।'
सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक गर्भावस्था के पहले 12 सप्ताह के भीतर महिलाएं गर्भपात करा सकती हैं। उसके बाद गर्भपात के 24वें सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति उसी समय दी जाएगी जब महिला के जीवन को खतरा हो या उसे शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर नुकसान होने का जोखिम हो। लेकिन ये प्रस्ताव तब ही लागू होगा जब अधिक संख्या मेंं लोग कानून निरस्त करने के लिए वोट करेंगे।
इस कानून को खत्म करने वाले समर्थकों ने हैशटैग होम टू वोट नाम से सोशल मीडिया पर एक कैंपेन भी शुरू किया था, जिसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को प्रेरित करना था कि वह प्रतिबंध को हटाने के लिए मतदान करें। हाल के पोल पर नजर डालें तो 56 फीसदी लोग ऐसे हैं जो इस कानून को खत्म करने के हक में हैं। वहीं 27 फीसदी लोग नहीं चाहते कि इस पर से प्रतिबंध हटे।