मानवाधिकार संगठनों ने भी इस सजा के लिए सऊदी अरब की आलोचना की है। इन संगठनों का कहना है कि ज़ैनब ने अपने बचाव में हत्या की और बहुत मुमकिन है कि वह मानसिक तौर पर बीमार थी।
एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि जैनब ने पुलिस की पूछताछ के दौरान अपना अपराध कुबूला था जबकि इस दौरान कानूनी तौर पर उसका कोई प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा था ना ही उसे दूतावास से मदद लेने की इजाजत दी गई।
सऊदी कानून के तहत, अधिकारियों को इस अपराध में मारी गई महिला के बच्चों के बड़े होने का इंतज़ार करना पड़ा ताकि वे ये फैसला ले सकें कि दोषी महिला को मौत की सज़ा दी जाए, उससे मुआवजा लिया जाए या उसे क्षमादान दिया जाए।