ब्रिटेन में संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस के लिए बृहस्पतिवार को होने जा रहे आम चुनाव में भारतीयों की निर्णायक और अभूतपूर्व भूमिका रहेगी।
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यही वजह है कि प्रचार अभियान में ब्रिटेन की सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव और मुख्य विपक्षी लेबर पार्टी ने भारतीय मतदाताओं को लुभाने के लिए अपनी सारी ताकत झोंक दी है।
जहां कंजर्वेटिव के डेविड कैमरन ने भारतीयों को रिझाने के लिए मंदिरों और गुरुद्वारों पर मत्था टेका तो वहीं, लेबर पार्टी के प्रमुख उम्मीदवार एड मिलिबैंड भी भारतीयों से मिलने उनके घरों तक गए।
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भारतीयों का मत
लेबर पार्टी जहां आम आदमी से जुड़े करों में रियायत और प्रगतिशील व्यापार नीतियों के सपने दिखा रही है, तो वहीं सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी देश की विदेश नीति में भारत की भूमिका अहम मान रही है। देखने वाली बात यह है कि ‘एक बार फिर कैमरन सरकार’ की दस डाउनिंग स्ट्रीट (ब्रिटिश पीएम का सरकारी कार्यालय) में वापसी होती है या फिर ब्रिटेन को कोई नया प्रधानमंत्री मिलता है।
चुनाव में लेबर और कंजर्वेटिव के टिकटों पर 15 भारतीय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। फिलहाल तमाम ओपिनियन पोल में किसी भी पार्टी को अकेले दम पर बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है।
लेकिन एक बात तय है कि इस बार के चुनाव में भारतीयों समेत एशियाई लोगों की भूमिका काफी अहम होगी। जिस पार्टी के पक्ष में भारतीयों का मत पडे़गा, वही इस चुनाव में बाजी मारेगा।
नतीजे जो भी हों ऐतिहासिक होगा ब्रिटेन चुनाव
शुक्रवार को नतीजे चाहे जो भी हों इसीलिए इस बार का चुनाव ऐतिहासिक माना जा रहा है। ब्रिटेन में भारतीयों की संख्या 14 लाख के पार हो चुकी है, जिनमें से 6,15,000 मतदाता हैं। पिछले साल हुए एक शोध में कहा गया था कि 2050 तक ब्रिटेन की आबादी में 30 फीसदी तक की आबादी अश्वेत हो जाएगी।
यानी कुल मिलाकर देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और प्रशासन में दखल रखने वाले एशियाई लोगों की अच्छी-खासी बढ़त हो जाएगी। ब्रिटेन में एशियाई लोगों की भूमिका को भांपते हुए ही पिछले साल ब्रिटिश प्रधानमंत्री कैमरन ने कहा था कि वह दिन दूर नहीं, जब ब्रिटेन की बागडोर किसी एशियाई के हाथ में होगी।
उधर, ब्रिटेन चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर भी जंग छिड़ गई है। फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सऐप पर कंजर्वेटिव और लेबर पार्टी के बीच आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर जारी है।
कैमरन के समर्थन में हिंदू संगठन
नारायण मूर्ति के दामाद भी मैदान में ब्रिटेन में इस बार के चुनाव में कंजर्वेटिव के टिकट पर इंफोसिस के सह संस्थापक नारायण मूर्ति के दामाद ऋषि सुनक और उत्तरी आयरलैंड से अमनदीप सिंह भोगल चुनावी मैदान में हैं।
वहीं लेबर पार्टी के टिकट पर वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा, कीथ वॉज जैसे प्रमुख भारतीय चुनावी दौड़ में हैं। भारत, अमेरिका समेत दुनिया भर की निगाहें चुनाव पर हैं।
ब्रिटेन में हिंदुओं के प्रतिनिधि संगठन नेशनल काउंसिल ऑफ हिंदू टेंपल (एनसीएचटी-यूके) की ओर से प्रधानमंत्री डेविड कैमरन की कंजर्वेटिव पार्टी का खुला समर्थन करने के कदम की समीक्षा के आदेश दिए गए हैं।
एनसीएचटी ने एक खुला पत्र जारी कर ब्रिटेन में आगामी सात मई को होने वाले आम चुनाव के लिए कंजर्वेटिव पार्टी का समर्थन किया था। ब्रिटेन में धर्मार्थ संगठनों की नियामक चैरिटी कमीशन ने इस कदम की समीक्षा के आदेश दिए।
लंदन स्थित वरिष्ठ पत्रकार सुरेश राणा कहते हैं कि अभी तक के सर्वे में दोनों बड़ी पार्टियों को 33-35 फीसदी मत मिलने की बात सामने आ रही है। कभी कंजर्वेटिव तो कभी लेबर पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।
मगर इससे सरकार तो बनने से रही। एक आकलन यह भी है कि अगर लेबर को ठीक-ठाक सीटें मिलीं और स्कॉटलैंड में स्कॉटिश नेशनल पार्टी को तकरीबन पचास सीटें मिलती हैं तो दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं। इसीलिए लेबर के पक्ष में एक गणित यह भी बैठ रहा है।