क्या सिर्फ़ 10 लफ़्ज़ों में आप पूरी किताब का मज़मून समझकर उसे काग़ज़ पर उतार सकते हैं।
अगर आप ऐसा कर सकते हैं तो आपकी पढ़ने-लिखने की ताकत काफ़ी बढ़ सकती है।
यूके की एसेक्स यूनिवर्सिटी का तो यही मानना है। यूनिवर्सिटी ने इसे ‘एक्स्ट्रीम ट्वीटिंग’ का नाम दिया है।
इसे ये नाम इसलिए दिया गया क्योंकि आपको ट्विटर की तरह 140 करेक्टर की शब्द सीमा में रहते हुए ही लिखना होता है।
यूनिवर्सिटी के मुताबिक छात्रों को इससे बेहद फ़ायदा पहुंचा है।
'एक्स्ट्रीम ट्वीटिंग'
'एक्स्ट्रीम ट्वीटिंग' को लेकर यूनिवर्सिटी ने कई वर्कशॉप की और इस दौरान छात्रों ने काफ़ी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
एक्ट्रीम ट्वीटिंग से जुड़े छात्र माइक्रो फ़िक्शन प्रोजेक्ट से जुड़े हैं।
माइक्रो फ़िक्शन प्रोजेक्ट के ज्वाइंट लीडर रिचार्ड येट्स इससे काफ़ी उत्साहित हैं।
उनके मुताबिक कम शब्दों में खुद को बयान करने से विचार विमर्श और निबंध लेखन में सचमुच फ़ायदा हो सकता है।
येट्स कहते हैं, "हम इस बारे में विचार कर रहे हैं कि कैसे माइक्रो फ़िक्शन के ज़रिए छात्रों की कम शब्दों में लिखने, समझकर पढ़ने और अपना असाइनमेंट ठीक से करने की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।"
माइक्रो फ़िक्शन
इन वर्कशॉप की शुरुआत मानविकी और तुलनात्मक अध्ययन संकाय के छात्रों से की गई जिस पर ज़बर्दस्त प्रतिक्रिया मिली हैं।
येट्स का मानना है कि इसका दूसरे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस तजुर्बे से एक अहम बात टीम के सामने आई।
टीम ने पाया कि माइक्रो फ़िक्शन का इस्तेमाल कर बड़ी आसानी से किसी लंबे-चौड़े टैक्स्ट के जटिल हिस्से समझे जा सकते हैं।
वजह ये है कि आपको उसमें से बेहद अहम और बड़ी चीज़ें ही चुननी होती है और फिर उसके ख़ास हिस्से केवल 10 या उससे भी कम शब्दों में पिरोकर लिखने होते हैं।