वैज्ञानिकों ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जो ड्राइवरलेस कारों के उपयोगकर्ताओं को नैतिक निर्णय लेती है कि संभावित कार दुर्घटना के समय में बचने वाला कौन होगा। पिछला अध्ययनों में पाया गया कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक ड्राइवरलेस कार को उपयोग संबंधी होना चाहिए।
इसके चलने से सड़क पर चल रहे यात्रियों को कम से कम नुकसान होने की संभावना है। हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में पैदल चलने वाले यात्रियों को जान का जोखिम भी हो सकता है।
ये भी पढे़ंः भारत में ड्राइवरलेस कार आने से पहले ही लगा ब्रेक
जबकि लोग इस सिद्धांत पर सहमत हुए है कि वह कभी उस कार में नहीं बैठना चाहेंगे जो उनकी जान की दुश्मन बने। इटली में बोलोग्ना विश्वविद्यालय में गुइसेप कंटिसा ने कहा कि हम यह जानना चाहते थे कि यदि कार द्वारा कोई अनहोनी होने वाली है तो उसके नियंत्रण की जिम्मेदारी कौन लेगा।