नौसैनिक युद्धाभ्यास ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ के लिए ब्रिटेन अगले साल विवादित दक्षिण चीन सागर में एक युद्धपोत भेजने की योजना बना रहा है। ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आए ब्रिटेन के रक्षामंत्री माइकल फलोन ने यह जानकारी दी है। ब्रिटेन की इस योजना से चीन एक बार फिर आंखें लाल कर सकता है।
पिछले साल जापान के साथ हुए संयुक्त युद्धाभ्यास में लड़ाकू विमान भेजने वाला ब्रिटेन अब समुद्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है। ऊर्जा संपन्न समुद्री क्षेत्र पर चीन अपना दावा जताता आया है, जबकि इसी दक्षिण चीन सागर में उसके पड़ोसी ब्रुनेई, मलयेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम भी अपना दावा करते रहे हैं। माइकल फलोन ने कहा कि हम अगले साल इस इलाके में अपना युद्धपोत भेज सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल हमने यह निश्चय नहीं किया है कि युद्धपोतों की तैनाती कहां पर होगी लेकिन हम नहीं चाहेंगे कि हमारा युद्धपोत जब दक्षिण चीन सागर से गुजरे तो चीन उसका विरोध करे। चूंकि हमें समुद्र में पोतों की आवाजाही का स्वतंत्र अधिकार है इसलिए हम यहां अभ्यास करेंगे। चीन के नौसैनिक विस्तार और उसकी विस्तारवादी नीति के चलते क्षेत्र में एक ब्रिटिश पोत की मौजूदगी से वहां तनाव बढ़ने की आशंका है।
फलोन का यह बयान ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि दो ब्रिटिश विमानवाहक पोत क्षेत्र में भेजे जाएंगे। ब्रिटेन की यह कार्रवाई लंदन और बीजिंग के बीच रिश्तों में तनाव ला सकती हैै, क्योंकि ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के बाद दोनों सरकारों ने अपने संबंधों मेें सुनहरे युग का आह्वान किया है।