आज के समय में मोटापा एक बीमारी की तरह लगातार फैलता जा रहा है। सेहत के लिए हानिकारक माने जाने वाले जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक युवाओं के बीच में काफी प्रसिद्ध हैं। इसमें इस्तेमाल होने वाली चीनी न केवल मोटापा बल्कि अन्य बीमारियों को भी निमंत्रण देती है। लेकिन ब्रिटेन ने अपने देश के लोगों को इन ड्रिंक्स से होने वाले खतरों से बचाने के लिए एक नया तरीका ईजाद कर लिया है।
सरकार ने देश में शुगर टैक्स लागू कर दिया है। यानि अब मीठी ड्रिंक्स खरीदने पर लोगों को अधिक पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। यह टैक्स सिस्टम गुरुवार को लागू किया गया। यह फैसला सरकार की मोटापा और मीठे से होने वाली अन्य बीमारियों से लड़ने की योजना का ही एक हिस्सा है।
सरकार ने मीठे पर अधिक ऊंची दर से
टैक्स लगाया है। इस फैसले के तहत प्रति लीटर 50 ग्राम चीनी वाले पेय पदार्थ पर 18 पेंस और प्रति लीटर 80 ग्राम चीनी वाले पेय पदार्थ पर 24 पेंस के हिसाब से कर लगाया जाएगा। शुगर टैक्स (सॉफ्ट ड्रिंक उद्योग) की घोषणा 2016 में ही ब्रिटेन के पूर्व चांसलर जॉर्ज ऑस्ब्रोन ने की थी। हालांकि इस कर की वसूली अभी ब्रिटेन के शीतल पेय निर्माताओं से ही करने का निर्णय लिया गया है। लेकिन यह साफ नहीं हो पाया है कि कंपनियां इस कर का भार उपभोक्ताओं पर भी डालेंगी या नहीं।
शुगर टैक्स लगाए जाने पर
ब्रिटेन के जूनियर वित्त मंत्री रॉबर्ट जेनरिक का कहना है कि मीठे के कारण बच्चे बचपन से ही मोटापे का शिकार हो जाते हैं लेकिन यह कर इससे लड़ने में हमारी मदद करेगा। उन्होंने कहा कि जिस पेय पदार्थ में जितना मीठा इस्तेमाल होगा उस पर उतना ज्यादा ही कर लगेगा। उन्होंने कहा, इस कर से सरकार सालाना 24 करोड़ पौंड जुटाएगी। इन पैसों का इस्तेमाल सीधे तौर पर स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स क्लब बनाने, स्कूलों में खेल सुविधाएं बढ़ाने और बच्चों में स्वास्थ्य संबंधित आदतें विकसित करने में किया जाएगा।