ब्रिटेन में स्तन कैंसर की आखिरी अवस्था से पीड़ित महिलाओं के बचने की संभावना अन्य कई देशों के मुकाबले काफी कम होती जा रही है।
'जर्नल ऑफ कैंसर' में ब्रिटेन, स्वीडन और कनाडा समेत पांच ऐसे देशों की तुलना की गई जहां आमदनी का स्तर काफी ऊंचा है।
ब्रिटेन में कैंसर की आखिरी अवस्था से पीड़ित सिर्फ 28 फीसदी महिलाएं तीन वर्ष तक जिंदा रह सकीं, वहीं स्वीडन में इन महिलाओं की तादाद 42 फीसदी तक पाई गई।
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ऐसी ढाई लाख से भी ज्यादा महिलाओं को शामिल किया जिनमें 2000 से 2007 के बीच कैंसर का पता चला।
ऐसे में कैंसर रिसर्च यूके ने सवाल उठाया है कि क्या ब्रिटेन में महिलाओं को ठीक इलाज मिल पा रहा है?
इलाज पर सवाल
ये अध्ययन इंटरनेशनल कैंसर बेंचमार्क पार्टनरशिप नाम की संस्था ने कराया है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, डेनमार्क, नॉर्वे और स्वीडन से ब्रिटेन के आंकड़ों की तुलना की गई।
स्तन कैंसर की सभी अवस्थाओं में पीड़ित के तीन साल तक जीवित रहने के मामले ब्रिटेन और डेनमार्क में 87 से 90 प्रतिशत मिले जबकि अन्य चार देशों ये आंकड़ा 91 से 94 प्रतिशत था।
लेकिन स्तन कैंसर की आखिरी अवस्था में पहुंच चुकी महिलाओं के सबसे कम समय तक जीवित रहने के मामले ब्रिटेन में ज्यादा देखने को मिले।
रिपोर्ट में ये भी संभावना जताई गई है कि अन्य पांच देशों के मुकाबले ब्रिटेन में स्तन कैंसर से पीड़ित उम्रदराज महिलाओं का इलाज भरपूर तवज्जो के साथ नहीं होता है।
कैंसर रिसर्च यूके से जुड़ीं डॉक्टर साराह वॉल्टर्स कहती हैं कि ब्रिटेन में अब हमें इस बात की छानबीन करनी चाहिए कि क्या ब्रिटेन में स्तन कैंसर की आखिरी अवस्था में पहुंच चुकी महिलाओं का इलाज अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो रहा है या नहीं।
कैंसर रिसर्च यूके में शुरुआती अवस्था में कैंसर का पता लगने के मामलों की निदेशक सारा हिओम का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तुलनाएं बहुत जरूरी हैं। इससे पता चलता है कि कैंसर से बचने की संभावना किन कारकों से प्रभावित हो रही है।