शराब पीना सेहत के लिए नुकसानदेह है। ये तो हम सभी जानते हैं। मगर कई जगहों पर ये तरक्की के लिए जरूरी है, ये बात कम ही लोग समझते हैं। बहुत से देश ऐसे हैं जहां शराब पानी की तरह पी जाती है। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बहुत से दफ्तरों में तो कर्मचारी दिन में भी शराब पीते हैं और ऑफिस में काम भी करते हैं।
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ऐसा नहीं है कि ये सभी शराब के आदी हैं, इसलिए पीते हैं। बल्कि ये इनके दफ़्तर के माहौल का हिस्सा है। लंच टाइम में जब सभी कर्मचारी एक साथ बैठते हैं, तो, वो एक एक-एक जाम टकरा लेते हैं। माना जाता है इससे कर्मचारियों के दरमियान एक मजबूत रिश्ता बनता है। वैसे भी ये खयाल बड़ा मजबूत है कि सिगरेट, तंबाकू और शराब की संगत वाला रिश्ता दीगर रिश्तों पर भारी पड़ता है।
बदल रहा है माहौल
लेकिन अब ब्रिटेन में भी माहौल बदल रहा है। फरवरी महीने में लॉयड्स जैसी नामी बीमा कंपनी ने लंच टाइम में शराब नोशी पर पाबंदी लगा दी है। इस पाबंदी के साथ ही ये माना जाने लगा कि ब्रिटेन में कारोबार के साथ पीने-पिलाने का चलन खत्म हो गया। लेकिन अभी भी बहुत से ऐसे पेशे हैं जहां ऑफिस टाइम में शराबनोशी का चलन बरकरार है।
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बीमा एजेंटों का कहना है कि अच्छी डील करने के लिए उन्हें लोगो को शीशे में उतारना पड़ता है। इसके लिए अपने ग्राहक को काफ़ी समय देना पड़ता है। ऐसे में उन्हें अच्छे संबंध बनाने के लिए शराब पीनी ही पड़ती है।
शराब पीने का रिवाज
ब्रिटिश सरकार के एक अंदाज़े के मुताबिक जो साहिब लोग हैं, अच्छी कमाई करते हैं वो हफ्ते में पांच दिन शराब पीते हैं। जबकि कम आमदनी वालों में बारह में से एक ही ऐसा शख्स मिलेगा जो हफ़्ते में पांच दिन शराब पीता हो। इसीलिए यहां शराब से जुड़ी बीमारियां भी लोगों को जकड़ रही हैं। एक रिसर्चर का कहना है कि बीमा, फाइनेंस, स्टॉक ब्रोकर, होटल इंडस्ट्री जैसे कारोबार हैं जहां लोगों को मजबूरन शराब पीनी पड़ती है. कई लोगों ने तो इसीलिए अपनी नौकरी छोड़ दी क्योंकि उन्हें मजबूरी में शराब पीनी पड़ती थी। इससे उनकी सेहत को नुकसान होता था।
लंदन की रहने वाला हाना ने तो इसी वजह से नौकरी छोड़ी थी। हाना बताती हैं कि वो अपने साथियों के साथ मिलकर रिपोर्ट तैयार करती थीं। जब सब लोग साथ बैठते थे तो शराब का दौर चलता ही था। और जब सिलसिला शुरू होता था तो जब तक काम खत्म नहीं होता था चलता ही रहता था। और किसी को मना करने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। एक तो आपको टीम को खुश रखना होता था और दूसरे अगर आप ना कहते हैं तो आपको टीम से अलग माना जाने लगता है।
दीगर पेशों के अलावा कानून के पेशे में भी शराब पीने का रिवाज बहुत आम है। जानकार कहते हैं कि क़ानून के पेशे में मुक़ाबला बहुत सख्त होता है। लोग आगे बढ़ने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। शराब पीने का रिवाज भी उसी का हिस्सा है।
शराब की महफिल बहुत कारआमद साबित होती
लंदन के वकील पैट्रिक कई लॉ फर्म में काम कर चुके हैं. पैट्रिक का कहना है कि उनके पेशे का एक अहम हिस्सा है 'बिज़नेस डिवेलपमेंट', जिसे 'बीडी' के नाम से जाना जाता है। 'बीडी' का मकसद है, पुराने ग्राहकों से अच्छे रिश्ते बनाए रखना, और नए ग्राहक तलाशना। इस काम में शराब की महफिल बहुत कारआमद साबित होती है।
अब अगर आपको बिजनेस में बने रहना है, और नए ग्राहक को अपने साथ लाना है, तो, ना चाहते हुए भी आपको शराब पीनी पड़ती है। यूं समझिए कि ये आपकी तरक़ का टोकन है। जो लोग ऐसा नहीं करते वो बिजनेस की रेस में पिछड़ जाते हैं।
नौजवान पीढ़ी के साथ अब हालात बदलते जा रहे हैं। अब कारोबारी रिश्ते बनाए रखने के लिए शराब पीना जरूरी नहीं रह गया है। वर्कप्लेस हेल्थ कंसल्टेंसी की मेंबर लॉरा मॉरिसन का कहना है कि नौजवान नस्ल अपने करियर पर ज़्यादा फोकस करती है। और बार में उड़ाने के लिए उनके पास पैसा नहीं है।
यूनिवर्सिटी की पढाई का खर्च बर्दाश्त करना ही उनके लिए मुश्किल होता है। ज्यादातर बच्चे कर्ज लेकर पढ़ाई करते हैं। अपना घर बार छोड़कर, दूसरे शहरों में रहकर नौकरी करते हैं। इसलिए उनके रहने खाने का खर्च भी काफी बढ़ जाता है। जबकि तनख्वाह उस अनुपात में नहीं बढ़ती।
बिजनेस मीटिंग आज भी उसी तरह होती हैं, जैसे अब से कुछ साल पहले शराब के साथ होती थी। लेकिन अब शराब की जगह सॉफ्ट ड्रिंक या नारियल पानी ने ले ली है। इस चलन को साल 1980 से लेकर साल 1999 तक पैदा होने वाली पीढ़ी ने आगे बढ़ाया है।
अगर बाद की नस्लें भी इसी चलन को बरकरार रखती है, तो 2025 तक सारी दुनिया में करीब 75 फीसद लोग बिजनेस मीटिंग में सॉफ्ट ड्रिंक और नारियल पानी ही पीते नज़र आएंगे। शराब पीने वालों की जमात छोटी हो जाएगी। लेकिन इसका ये मतलब हरगिज नहीं है कि ऑफिस आवर्स में शराबनोशी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। हरेक ऑफिस में कुछ लोगों की जमात ऐसी जरूर होगी जो चाहेगी कि सारा दिन काम करने के बाद शाम बार या पब में गुजारी जाए।
वो लोग शायद गालिब का ये शेर गुनगुनाएं कि...
गालिब छुटी शराब पर अब भी कभी कभी, पीता हूं रोजे अब्र शबे माहताब में