यूरोपियन यूनियन (ईयू) में इस बात का गहराई से आकलन किया जा रहा है कि यूरोप के रूस से तेल और गैस खरीदना पूरी तरह रोक देने का रूसी अर्थव्यवस्था पर किस हद तक असर पड़ेगा। यहां विशेषज्ञ यह अनुमान लगाने की कोशिश में हैं कि जितनी मात्रा यूरोपीय देश रूस से तेल और गैस खरीदते हैं, क्या रूस उसे बेचने के लिए नए ग्राहक ढूंढ सकेगा?
ईयू में पहले रूस से तेल और गैस आयात रोकने को लेकर हिचक थी। लेकिन अब इस बारे में सहमति बनती जा रही है। ईयू के विशेषज्ञों की राय है कि अगर रूस नए ग्राहक नहीं ढूंढ पाया, तो ईयू के खरीदारी रोकने से उसकी अर्थव्यवस्था बुरी तरह जख्मी हो जाएगी। रूस की विदेशी मुद्रा की आय का सबसे बड़ा जरिया तेल और गैस ही हैं। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, और ऑस्ट्रेलिया रूसी तेल और गैस की खरीदारी रोक चुके हैं। जापान ने कहा है कि वह जी-7 की बैठक के बाद इस बारे में फैसला करेगा। ईयू और जापान ने अगर ये खरीदारी रोक दी, तो दुनिया की आधी अर्थव्यवस्था का बाजार रूस की पहुंच से बाहर हो जाएगा।
लेकिन कुछ विश्लेषकों की राय है कि रूसी तेल और गैस न आने का यूरोप को भी भारी नुकसान होगा। वहां अभी ही इन ईंधन की महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है। इस बीच अमेरिका में भी गैस के औसत दाम में इजाफा हुआ है, जबकि अमेरिका गैस के बड़े उत्पादक देशों में शामिल है। मंगलवार को सामने आए आंकड़ों के मुताबिक गैस की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो एक रिकॉर्ड है। इसके पहले ये रिकॉर्ड चार मार्च को बना था। मंगलवार को ये कीमत उससे भी चार सेंट ऊपर दर्ज की गई।