यूरोप के उत्तर-पूर्वी कोने में दो छोटे बाल्टिक देश (एस्टोनिया और लातविया) भारतीय आईटी पेशेवरों और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए एक नया और तेजी से उभरता ठिकाना बनते जा रहे हैं। भारतीय उद्यमियों के बीच एस्टोनिया की लोकप्रियता का ग्राफ यहां की ई-रेसिडेंसी योजना है, जो किसी को भी घर बैठे पूरी तरह ऑनलाइन ही एक ईयू कंपनी बनाने की सुविधा देती है। उधर, लातविया में भारतीयों की मौजूदगी मुख्यतः वर्क वीजा व नौकरियों के जरिये बढ़ी है।
एस्टोनिया में ई-रेसिडेंट्स की कुल संख्या के हिसाब से फिलहाल भारत दुनिया में नौवें स्थान पर चीन से पीछे है, लेकिन कंपनियां बनाने की संख्या में भारत चीन से भी आगे है। भारतीय ई-निवासी यहां वेब डिजाइनिंग, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, कंटेंट राइटिंग जैसे कई क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। सरकार बंगलूरू, मुंबई, दिल्ली और चेन्नई में भारतीय डिजिटल उद्यमियों को इस योजना से जोड़ रही है। लातविया में आईटी, टेक सेवाओं, फाइनेंस और डिजिटल मार्केटिंग में मांग सबसे अधिक है। 2025 की पहली तिमाही में करीब 21,500 नौकरियां खाली थीं, जबकि बेरोजगारी दर 7.4% रही। यह विदेशी कुशल पेशेवरों के लिए मौके दिखाता है।
भारतीयों के लिए मौके और वेतन
बाल्टिक देशों में कुशल भारतीय कार्यबल की मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इनमें सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट (जावा, पायथन, रिएक्ट), साइबर सुरक्षा, डाटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई इंजीनियरिंग खास हैं।
एस्टोनिया में वरिष्ठ आईटी पेशेवर का औसत वेतन 3,500 से लेकर 5,500 यूरो प्रति माह (लगभग 3.2 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये) है। जबकि लातविया में आईटी पेशेवरों का शुरुआती और मध्य-स्तरीय वेतन 2,000 से 3,800 यूरो (2 लाख रुपये से 3.8 लाख रुपये तक) प्रति माह मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार वेतन भी कुछ देशों के मुकाबले भी अच्छा है।
हर साल 1500 भारतीय छात्र-पेशेवर पहुंच रहे
एस्टोनिया और लातविया में 6,000 से 8,000 भारतीय रह रहे। हर साल भारत से 1,200 से 1,500 छात्र और पेशेवर वीजा लेकर बाल्टिक देशों में पहुंचते हैं। लातविया में बड़ा हिस्सा रीगा टेक्निकल यूनिवर्सिटी व यूनिवर्सिटी ऑफ लातविया में कंप्यूटर साइंस व इंजीनियरिंग कर रहा, जबकि एस्टोनिया में अधिकतर भारतीय कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डाटा साइंटिस्ट व साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ हैं।
एस्टोनिया गए बिना यूरोपीय बाजार तक पहुंच
एस्टोनिया ने 2014 में दुनिया की पहली ई-रेसिडेंसी योजना शुरू की थी, जो किसी देश के नागरिक को बिना वहां रहे डिजिटल पहचान देती है। इससे व्यक्ति ऑनलाइन ईयू-आधारित कंपनी खोल सकता है, बैंकिंग व टैक्स से जुड़े काम कर सकता है। यानी भौतिक रूप से एस्टोनिया गए बिना यूरोपीय बाजार तक पहुंच मिलती है। इसका लाभ उठाने वालों में भारत के कई प्रतिष्ठित उद्यमी भी हैं। यह बाल्टिक-भारत टेक एक्सचेंज की सफल केस-स्टडी बन चुका है।
भारत-एस्टोनिया शिक्षा-तकनीक साझेदारी की एक मिसाल
एस्टोनिया की एडटेक कंपनी एल्पा किड्स, प्रीस्कूल बच्चों के लिए स्थानीय भाषा में शिक्षा-एप बनाती है। इसने भारत को अपने सबसे बड़े बाजारों में से एक बनाया है। इसके एप्स हिंदी, मराठी, तमिल, गुजराती, पंजाबी और कन्नड़ में उपलब्ध हैं और 10 लाख से अधिक भारतीय बच्चे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह भारत-एस्टोनिया शिक्षा-तकनीक साझेदारी की एक मिसाल है, हालांकि यह कंपनी खुद भारतीय-स्थापित नहीं, एस्टोनियाई है।