दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में भारतीय समुदाय अपनी सांस्कृतिक और कारोबारी पहचान को तेजी से मजबूत कर रहा है। गुआरानिया सप्ताह के दौरान स्थानीय संगीत परंपरा के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र बनी हैं। भारतीय समुदाय राखी और गणेश चतुर्थी जैसे त्योहारों की तैयारियों में भी जुटा है।
दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में भारतीय प्रवासी समुदाय नया और शांत पावरहाउस बनकर उभर रहा है। देश में 30 अगस्त तक गुआरानिया सप्ताह मनाया जा रहा। देश के इस सबसे बड़े सांस्कृतिक महोत्सव में ईस्ट-मीट्स-साउथ अमेरिका थीम के तहत स्थानीय गुआरानिया संगीत और भारतीय शास्त्रीय संगीत के जुगलबंदी के 50 से अधिक कार्यक्रम हो रहे हैं।
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राखी व गणेश चतुर्थी की भी तैयारियां जारी हैं। गुआरानिया यानी धीमी, आत्मा को छूने वाली धुन वाले संगीत में देश के ओरक्वेस्ता सिन्फोनिका नासियोनाल ने सेंट्रल बैंक ऑफ पराग्वे के ग्रैंड थिएटर में कॉन्सर्ट प्रस्तुत किया। कुछ साल में यहां आकर बसे 1200 भारतीय मूल के लोग घरों में हिंदी, गुजराती-पंजाबी बोलते हैं। व्यावसायिक रूप से ये स्पेनिश भाषा बोलते हैं।
भारत आज भी हमारी आत्मा
भारतीय समुदाय के उद्योगपतियों में वेमारकॉर्प के शीर्ष प्रबंधन ने कहा कि पराग्वे हमारी कर्मभूमि है, पर भारत आत्मा है। आज भारत की बढ़ती वैश्विक साख के चलते स्थानीय प्रशासन और समाज हमें बेहद सम्मान से देखता है। यूपीएल लिमिटेड ग्रुप के सीईओ जयदेव श्रॉफ ने पराग्वे को निवेश के लिए असाधारण देश बताया व कहा उनकी कंपनी ने वहां संपत्ति दोगुनी कर ली है।
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पराग्वे में भारतीयों का जलवा
पराग्वे में भारतीयों का सफर पिछले एक दशक में काफी अधिक तेजी से बदला रहा है। कभी महज रिटेल और सीमावर्ती बाजारों में व्यापार करने वाला यह समुदाय आज पराग्वे के स्टील, एग्रोकेमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर अपना दबदबा बना चुका है।
मूल निवासी भी भारतीय समोसे और मसाला चाय के दीवाने
पराग्वे में बसे भारतीयों में सिंधी और पंजाबी लोग अधिक हैं। यहां हर गली-मोहल्ले में राष्ट्रीय पेय तेरेरे (ठंडी हर्बल टी) मिलती है। वहीं, स्थानीय युवाओं के बीच भारतीय समोसे और मसाला चाय का क्रेज बढ़ा है। गुआरानिया सप्ताह में देश भर में आयोजित कार्यक्रमों में इनकी सैकड़ों स्टाल लगी हैं, जहां मूल निवासी भी भारतीय स्वाद के दीवाने हैं।