महाराष्ट्र में स्मार्ट मीटर विवाद के बीच महावितरण ने पालघर के अधीक्षण अभियंता मदन सांगले को निलंबित कर दिया है। आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को पत्र लिखकर स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध किया। महावितरण ने इसे अनुशासनहीनता बताया है। आइए, विस्तार से पूरे मामले को जानते हैं...
महाराष्ट्र में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर विवाद के बीच महावितरण के एक वरिष्ठ इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है। पालघर सर्कल कार्यालय के अधीक्षण अभियंता मदन सांगले पर आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति के अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को पत्र लिखकर स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध किया। महावितरण प्रबंधन ने इसे अनुशासनहीनता और प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की है।
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मामला तब सामने आया जब मदन सांगले की ओर से दो दिन पहले अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को एक पत्र भेजा गया। इस पत्र में कहा गया था कि यदि घरेलू उपभोक्ताओं के मौजूदा बिजली मीटर उनकी स्पष्ट सहमति के बिना स्मार्ट मीटर से बदले जाते हैं, तो किसी भी जनआक्रोश, विवाद या उपभोक्ता आंदोलन की जिम्मेदारी कंपनी की होगी। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद महावितरण मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया।
क्या लिखा था इंजीनियर के पत्र में?
मदन सांगले ने अपने पत्र में आशंका जताई थी कि बिना उपभोक्ताओं की सहमति के स्मार्ट मीटर लगाए जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ सकती है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे विरोध प्रदर्शन और विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। पत्र में यह भी कहा गया था कि ऐसी परिस्थितियों की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी।
महावितरण के कोंकण क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त प्रबंध निदेशक ने मदन सांगले के निलंबन का आदेश जारी किया। कंपनी का कहना है कि सांगले ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लिए बिना सीधे बाहरी कंपनी को पत्र भेजा। महावितरण के अनुसार, किसी अधिकारी का आधिकारिक नीति के विपरीत जाकर स्वतंत्र रूप से रुख अपनाना और उसे बाहरी संस्था तक पहुंचाना प्रशासनिक अनुशासन के खिलाफ है।
स्मार्ट मीटर नीति पर महावितरण का क्या कहना?
महावितरण ने स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के दिशा-निर्देशों के तहत लागू की जा रही है। कंपनी के मुताबिक, उपभोक्ताओं को त्रुटिरहित मीटर उपलब्ध कराना और बिजली खपत का सटीक रिकॉर्ड रखना भारतीय विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 55 के तहत वैधानिक जिम्मेदारी है। इसलिए स्मार्ट मीटर परियोजना सरकार की नीति का हिस्सा है।
क्या बढ़ सकता है स्मार्ट मीटर विवाद?
महाराष्ट्र में पहले से ही कई स्थानों पर स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर विरोध देखने को मिला है। विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन भी इस मुद्दे पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में एक वरिष्ठ इंजीनियर के निलंबन ने इस बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक रंग भी ले सकता है।