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Protests: पाकिस्तान में क्यों जबरन गायब किए जा रहे बलूच लोग, सड़कों पर हो रहे विरोध प्रदर्शन का चेहरा कौन?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Fri, 05 Jan 2024 04:04 PM IST

सार

Baloch Protests: बलूचिस्तान में बढ़ती हत्याओं और अपहरण की घटनाओं के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन हो रहे हैं। ताजा प्रदर्शन 24 वर्षीय बलूच युवक बालाच मोला बख्श की हिरासत में हत्या के बाद शुरू हुए हैं। 
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प्रदर्शन करते बलूचिस्तान के लोग - फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तान का बलूचिस्तान सूबा इन दिनों नागरिकों के विरोध की वजह से उबल रहा है। इन प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले साल हो गई थी जो नए साल में भी जारी हैं। इस पूरे विरोध का चेहरा एक्टिविस्ट महरंग बलोच बनी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बलूचिस्तान में हत्याएं और अपहरण की घटनाएं बहुत अधिक बढ़ गई हैं। उधर पाकिस्तान की सेना ने गुस्से को शांत करने के लिए कार्रवाई भी तेज कर दी है जिसका मानवाधिकार संगठनों ने विरोध किया है। इस बीच, बलूच संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के सामने प्रदर्शन करने का एलान किया है। 

आइये जानते हैं कि आखिर बलूचिस्तान में क्या हो रहा है? पाकिस्तान में हो रहे प्रदर्शनों की वजह क्या है? विरोध का चेहरा बनीं महरंग बलोच कौन हैं? क्या इस तरह के प्रदर्शन पाकिस्तान में पहली बार हो रहे हैं? बलूचिस्तान के लोगों का विरोध प्रदर्शनों का क्या इतिहास है?
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प्रदर्शन करते बलूचिस्तान के लोग - फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तान का बलूचिस्तान सूबा इन दिनों नागरिकों के विरोध की वजह से उबल रहा है। इन प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले साल हो गई थी जो नए साल में भी जारी हैं। इस पूरे विरोध का चेहरा एक्टिविस्ट महरंग बलोच बनी हुई हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बलूचिस्तान में हत्याएं और अपहरण की घटनाएं बहुत अधिक बढ़ गई हैं। उधर पाकिस्तान की सेना ने गुस्से को शांत करने के लिए कार्रवाई भी तेज कर दी है जिसका मानवाधिकार संगठनों ने विरोध किया है। इस बीच, बलूच संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के सामने प्रदर्शन करने का एलान किया है। 

आइये जानते हैं कि आखिर बलूचिस्तान में क्या हो रहा है? पाकिस्तान में हो रहे प्रदर्शनों की वजह क्या है? विरोध का चेहरा बनीं महरंग बलोच कौन हैं? क्या इस तरह के प्रदर्शन पाकिस्तान में पहली बार हो रहे हैं? बलूचिस्तान के लोगों का विरोध प्रदर्शनों का क्या इतिहास है?

प्रदर्शन करते बलूचिस्तान के लोग - फोटो : सोशल मीडिया
आखिर बलूचिस्तान में क्या हो रहा है? 
बलूचिस्तान में बढ़ते मानवाधिकार के उल्लंघन को लेकर बवाल मचा हुआ है। यहां जबरन गायब किए जाने और न्यायेतर हत्याओं (एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग) को खत्म करने की मांग को लेकर लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों की शुरुआत पिछले साल दिसंबर में हुई थी जो अब भी जारी हैं। हालिया घटनाक्रमों की बात करें तो 3 जनवरी को देशव्यापी 'शटर डाउन स्ट्राइक' आयोजित की गई जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। यह हड़ताल देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनावर उल हक काकर के एक बयान के बाद बुलाई गई जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी करार दिया था। 

इससे पहले ईरानी सीमा के पास तुरबत से पाकिस्तानी राजधानी इस्लामाबाद तक 1,800 किलोमीटर लंबा मार्च भी निकला गया था। इस मार्च में वो लोग शामिल हुए थे जिनके परिजन या तो लापता हैं और उनमें से कई दशकों से या कथित तौर पर न्यायेतर तरीके से मारे गए हैं।

प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय राजधानी की ओर अपने सप्ताह भर के मार्च के दौरान काफी मशक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस्लामाबाद पुलिस ने मार्च को रोकने के लिए बल का उपयोग किया। प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी की। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी महिलाओं और बच्चों को बलूचिस्तान वापस भेजने की कोशिश भी की गई। हालांकि, लोगों के दबाव और इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के कारण प्रदर्शनकारियों को प्रेस क्लब तक पहुंचने की अनुमति दी गई।

बलूचिस्तान - फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान में हो रहे प्रदर्शनों की वजह क्या है? 
ताजा प्रदर्शन 24 वर्षीय बलूच युवक बालाच मोला बख्श की हिरासत में हत्या के बाद शुरू हुए हैं। दरअसल, बख्श को 29 अक्तूबर 2023 को आतंकवाद निरोधक पुलिस अपने साथ ले गई। अधिकारियों ने दावा किया कि उसे विस्फोटकों के साथ पकड़ा गया था, उसे लगभग एक महीने तक हिरासत में रखा गया। 23 नवंबर 2023 को बख्श की जमानत याचिका पर सुनवाई होने से एक दिन पहले उसकी मौत हो गई। अधिकारियों ने दावा किया कि बख्श सहित एक प्रतिबंधित समूह के चार आतंकवादी बलूचिस्तान के एक शहर तुरबत में पुलिस के साथ गोलीबारी के दौरान मारे गए। हालांकि, बख्स के परिवार ने आतंकवाद के दावे का खंडन किया है और कहा है कि उनकी मृत्यु पुलिस हिरासत में हुई। इसके बाद ही विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई। 

महरंग बलोच - फोटो : Social media
विरोध का चेहरा कौन हैं?
इस पूरे विरोध के केंद्र में बलूच एक्टिविस्ट डॉ. महरंग बलोच हैं। कार्यवाहक पीएम काकर के 'आतंकवादी' वाले बयान के बाद 'शटर डाउन स्ट्राइक' भी महरंग के नेतृत्व में हुई। एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि मानवाधिकार उल्लंघनों की विस्तृत जांच के लिए यूएन वर्किंग ग्रुप की अध्यक्षता में एक फैक्ट फाइंडिंग मिशन को बलूचिस्तान भेजना चाहिए। इसके साथ ही महरंग ने यह भी मांग की कि प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों और जबरन गायब किए गए लोगों को जल्द से जल्द छोड़ा जाना चाहिए। 

महरंग बलोच - फोटो : Social media
महरंग बलोच कौन हैं?
बलूचिस्तान में अधिकारियों द्वारा गैरकानूनी तरीके से गायब किए जाने और न्यायेतर हत्या जैसे उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष कर रहीं महरंग पाकिस्तान की एक बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। 1993 में जन्मीं महरंग के पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव एक मजदूर थे। पहले उनका परिवार क्वेटा में रहता था लेकिन मां की बीमारी के इलाज के लिए कराची स्थानांतरित हो गया। महरंग पेशे से चिकित्सक हैं, जिन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई की हुई है। 

महरंग का अब तक का सफर कांटों भरा रहा है। उनके मानवधिकार कार्यकर्ता बनने के पीछे भी दर्दनाक कहानी है। दरअसल, दिसंबर 2009 में उनके पिता को कराची में अस्पताल ले जाते समय पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जबरन अपहरण कर लिया था। 16 साल की उम्र में, महरंग ने तुरंत पिता के अपहरण का विरोध करना शुरू कर दिया और छात्र आंदोलनों में जाने लगीं। जुलाई 2011 में उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा जब उनके पिता को मार दिया गया।

परेशानियों का सिलसिला यहीं नहीं थमा, दिसंबर 2017 में उनके भाई का भी अपहरण कर लिया गया और उसे 3 महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया। तब से महरंग बलूच प्रतिरोध आंदोलन में एक प्रमुख चेहरा बन चुकी हैं।

यूएन के बाहर प्रदर्शन करते बलूच लोग - फोटो : ANI
क्या है पहले भी हुई हैं ऐसी घटनाएं?  
 पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) के अनुसार, सरकार असहमति को दबाने के लिए जबरन गायब किए जाने को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती है। बलूचिस्तान में जबरन गायब करने के मामले 1970 के दशक से सामने आ रहे हैं। हालांकि, 2000 के दशक की शुरुआत से जबरन गायब करना और कथित न्यायेतर हत्याएं बलूचिस्तान में तेज हो गईं। बीते दो दशकों के दौरान, पीड़ित परिवारों को कभी-कभी सहानुभूति तो मिली, लेकिन कभी न्याय नहीं मिला। पिछले कुछ वर्षों में, कई बलूच महिलाओं ने अपने लापता प्रियजन के लिए न्याय की मांग करते हुए इस मुद्दे को वैश्विक रूप से उठाने की कोशिश की है।

पाकिस्तान के अंतरिम प्रधानमंत्री अनवर-उल-हक काकर। - फोटो : Social Media
आगे क्या होगा?
हालिया प्रदर्शनों के बाद कार्यवाहक पीएम काकर ने न केवल बलूच प्रदर्शनकारियों की मांगों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान में खराब आपराधिक न्याय प्रणाली को जबरन गायब होने की घटनाओं और गैर-न्यायिक हत्याओं का दोषी ठहरा दिया। 

काकर ने बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर करने वाले बुद्धिजीवियों और पत्रकारों की आलोचना की और यह तक कह दिया कि वे बलूच सशस्त्र संघर्ष में शामिल नहीं हों। उधर अधिकारियों ने भी बलूचिस्तान में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोगों के खिलाफ उनकी गतिविधियों को देश विरोधी बताते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।  

उधर बलूच एकजहती समिति (BYC) ने एलान किया है वह अपनी मांगों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के दफ्तर के सामने प्रदर्शन करेगी। इसके लिए सरकार को सात दिनों का अल्टीमेटम भी दिया गया है।
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