फ्रांस के राष्ट्रपति की दो दिवसीय यात्रा को यूरोप में फ्रांस और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। नीदरलैंड रॉयल हाउस ने कहा है कि मैंक्रो की यात्रा फ्रांस और नीदरलैंड के बीच संबंधों की पुष्टि करती है।
ताइवान मुद्दे पर अमेरिका को लेकर अपने बयानों के कारण चर्चा में चल रहे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो नीदरलैंड की दो दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों भी होंगी। वे वहां 11 और 12 अप्रैल को रहेंगे। नीदरलैंड रॉयल हाउस ने उनकी यात्रा के बारे में जानकारी साझा की है। नीदरलैंड रॉयल हाउस ने कहा है कि उनकी यात्रा फ्रांस और नीदरलैंड के बीच संबंधों की पुष्टि करती है।
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नीदरलैंड रॉयल हाउस ने जारी किया बयान
फ्रांस के राष्ट्रपति की दो दिवसीय यात्रा को यूरोप में फ्रांस और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग के रूप में देखा जा रहा है। नीदरलैंड रॉयल हाउस ने कहा है कि मैंक्रो की यात्रा फ्रांस और नीदरलैंड के बीच संबंधों की पुष्टि करती है। साथ ही यह यूरोप को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों सहित उनके सहयोग को और गहरा करने में भी मदद करेगी।
नीदरलैंड की उनकी यात्रा के दौरान किंग विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा एम्स्टर्डम के डैम स्क्वायर में आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति मैंक्रों और उनकी पत्नी का स्वागत करेंगे। इसके बाद राष्ट्रपति मैक्रों डैम स्क्वायर में राष्ट्रीय स्मारक पर शहीदों की याद में पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। साथ ही, यात्रा के दौरान वह द हेग में स्टेट्स जनरल का दौरा करेंगे। इसके अलावा, सीनेट के अध्यक्ष जन एंथोनी ब्रुजन और प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष वेरा बर्गकैम्प के साथ बैठक करेंगे।
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क्वांटम प्रौद्योगिकी पर गोलमेज चर्चा में लेंगे भाग
यात्रा के दौरान वे नीदरलैंड के राजा और के साथ यूरोपीय चिप्स एक्टऔर क्वांटम प्रौद्योगिकी के संदर्भ में बेहतर तकनीक के लिए यूरोपीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के महत्व पर एक गोलमेज चर्चा में भी भाग लेगें। दोनों देशों के प्रमुखों के अलावा इस चर्चा में मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों और निवेशक भी शामिल होंगे।
गौरतलब है कि फ्रांस के राष्ट्रपति की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब राष्ट्रपति मैंक्रों ने अपनी हालिया चीन यात्रा से लौटने के बाद ताइवान मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने इस मसले पर अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा था कि यूरोप को बीजिंग या वाशिंगटन का पिछलग्गू नहीं बनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी अपील की थी कि ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच किसी भी संघर्ष में शामिल होने से अन्य देशों को बचना चाहिए।