उद्योगपति एलन मस्क और ट्विटर के बीच उलझते विवाद से इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को नुकसान हुआ है। अब इस मामले में अमेरिका के डेलावेयर स्थित जज चाहें जो फैसला दें या दोनों पक्षों में अगर समझौता भी हो जाए, तब भी हो चुके नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी। यह बात इस मामले पर निकटता से नजर रख रहे विशेषज्ञों ने कही है। इन विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रकरण में सबसे ज्यादा नुकसान में एलन मस्क ही रहे हैं। उन्होंने अपने अस्थिर स्वभाव से अपने हितों को चोट पहुंचाई है। सबसे ज्यादा क्षति उनकी प्रतिष्ठा को पहुंची है। उनकी अब ऐसी छवि बन गई है कि भविष्य में किसी कंपनी को खरीदने की उनकी पेशकश को लोग गंभीरता से नहीं लेंगे। इसके अलावा उन्हें बड़ी आर्थिक क्षति भी होगी।
डेलावेयर अदालत में वे केस हार गए, तो करार की शर्त तोड़ने के कारण उन्हें एक बिलियन डॉलर का भुगतान ट्विटर को करना पड़ेगा। जानकारों के मुताबिक कम से कम चार करोड़ 40 लाख डॉलर का भुगतान तो उन्हें जरूर ही करना पड़ेगा। लेकिन उनके लिए इससे भी बुरा फैसला आ सकता है। यह संभव है कि जज ट्विटर को खरीदने के करार से हटने की इजाजत उन्हें न दे। उस हालत में अदालत उन्हें ट्विटर के प्रति शेयर को 54.20 डॉलर के भाव से खरीदने का आदेश दे सकती है। इसके अलावा उन पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
वैसे नुकसान सिर्फ उनका ही नहीं है। ट्विटर के कर्मचारियों भी इस दौरान अधर में लटके रहे हैं। वे एक ऐसी स्थिति का शिकार रहे हैं, जिसे पैदा करने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। मस्क ने ट्विटर को बाजार में उसके शेयरों को मिल रही कीमत से कहीं अधिक दाम पर खरीदने का एलान किया था। इससे कर्मचारियों की उम्मीद बढ़ी थी। जिन कर्मचारियो को स्टॉक ऑप्शन यानी कंपनी के शेयर मिले हुए हैं, उन्होंने इस बिक्री में अपने लिए भारी फायदा देखा था। लेकिन उन्हें न सिर्फ उससे वंचित होना पड़ेगा, बल्कि विवाद की वजह से ट्विटर के शेयरों के भाव गिरे, तो उसका नुकसान भी उन्हें झेलना पड़ेगा।
ट्विटर का निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) के लिए भी ये सारा प्रकरण घाटे का सौदा है। निदेशक मंडल पहले से इस बात से वाकिफ था कि एलन मस्क से डील करना एक खराब सौदा है। शुरुआत में उसने मस्क की खरीदारी की पेशकश ठुकराने का मन भी बनाया था। लेकिन शेयर होल्डर्स के दबाव में उसे मस्क की पेशकश मंजूर करनी पड़ी। ट्विटर के संस्थापक जैक डॉरसी ने भी बिक्री का पक्ष लिया था। उधर मस्क की ट्विटर आर्मी (उनके समर्थक ट्विटर यूजर्स) ने इस मुद्दे पर निदेशक मंडल के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। उससे बने दबाव में निदेशक मंडल लाचार हो गया।
बाजार विश्लेषकों ने कहा है कि इस मामले में फायदा सिर्फ एक समूह का है- दोनों पक्षों के वकीलों को इसमें अरबों की कमाई होगी। इसके अलावा सभी संबंधित पक्ष घाटे में रहेंगे। ये आम राय है कि इस मामले में एक सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म के रूप में ट्विटर की भूमिका पर भी दाग लगे हैं।