कैलिफोर्निया राज्य के निर्वाचक मंडल के सभी 55 वोट सोमवार शाम साढ़े पांच बजे जोसफ जो बाइडन के पक्ष में जाते ही उन्हें औपचारिक रूप से अमेरिका का 46वां राष्ट्रपति घोषित कर दिया गया । इन मतों ने उन्हें जीत के लिए आवश्यक 270 वोटों के पार पहुंचा दिया। माना जा रहा है, इस औपचारिक जीत के बाद मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा छह सप्ताह से खड़ी की जा रही कानूनी बाधाओं और चुनावी विवादों पर भी विराम लग जाएगा।
बाइडन ने जीत के बाद विल्मिंगटन में ऑनलाइन संबोधन में ट्रंप और उनके समर्थकों पर देश की निर्वाचन व्यवस्था पर संशय पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने चुनाव प्रक्त्रिस्या के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने और चुनाव अधिकारियों पर मनगढ़ंत आरोप लगाने को अभूतपूर्व दर्जे की बेशर्मी करार दिया। बाइडन ने कहा, लोकतंत्र में कोई नेता लोगों से शक्ति छीन नहीं सकता, लोग ही उसे शक्ति सौंपते हैं। उन्होंने इन बातों को भूलकर चुनाव अधिकारियों को निष्पक्ष चुनावों के लिए आभार जताने को कहा। साथ ही दावा किया, नागरिकों ने देश की संस्थाओं की ईमानदारी में विश्वास जताया है, अब सुधारों का समय है।
इस औपचारिक जीत के अर्थ
पहला अर्थ ऱ् अपने तीसरे प्रयास में बाइडन अमेरिका के आधिकारिक राष्ट्रपति बन गए हैं। अब उनकी सबसे बड़ी चुनौती देश को कोरोना महामारी से उबारना है।
दूसरा अर्थ ऱ् ट्रंप व रिपब्लिकन अब बाइडन को राष्ट्रपति मानने से इनकार नहीं कर पाएंगे। इसका असर भी दिखा, जब बाइडन के आलोचना साउथ कैरोलीना से सीनेटर लिंडसे ग्राहम सहित कई अन्य ने बाइडन के साथ काम करने की इच्छा जताई।
अब आगे क्या
निर्वाचक मंडल के वोट अब अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस को भेजे जाएंगे। जहां छह जनवरी से शुरू हो रहे सत्र में परिणामों की औपचारिक घोषणा होगी। इसके दो हफ्ते बाद राष्ट्रपति का पदग्रहण होगा।
ट्रंप नहीं होंगे समारोह में शामिल
सूत्रों के अनुसार ट्रंप ने बाइडन के पदग्रहण समारोह का हिस्सा बनने से इनकार किया है। वाइट हाउस के एक सलाहकार के अनुसार ट्रंप ऐसा करके चुनाव परिणाम स्वीकार न करने का सार्वजनिक संकेत देंगे।
पुतिन ने दी बधाई
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बाइडन को जीत पर बधाई दी। उन्होंने बाइडन से बातचीत और संपर्क बढ़ाने की बात कही। रूस ने पहले बधाई देने के लिए आम चुनाव में जीत के बाद अमेरिका में जारी राजनीतिक विवादों के खत्म होने तक इंतजार करने की बात कही थी। अब पुतिन ने कहा, रूस व अमेरिका में भले ही मतभेद हों, लेकिन वैश्विक सुरक्षा, स्थायित्व व कई समस्याओं को सुलझाने में योगदान करते हैं। उनके संबंध आपसी सम्मान पर आधारित हैं, इनसे न केवल उनके नागरिक बल्कि समस्त विश्व समुदाय को लाभ होता है।
ट्रंप समर्थकों ने दी थी प्रदर्शन की धमकी, लेकिन आए नहीं
सभी राज्यों में निर्वाचक मंडल मतदान शांतिपूर्ण रहा। एरिजोना, जॉर्जिया, पेनसिल्वेनिया जैसे कड़े मुकाबले वाले राज्यों में ट्रंप समर्थकों ने आम मतदान में धांधली का आरोप लगाते प्रदर्शन की धमकी दी थी, लेकिन प्रदर्शन नहीं हुए। कुछ जगह प्रदर्शनकारी जुटे, लेकिन सुरक्षाबलों की संख्या अधिक होने से वे निकल लिए।
कोई ‘फेथलैस’ वोट नहीं
पूर्व आकलन के अनुसार ही निर्वाचक मंडल के 538 में से बाइडन को 306 और ट्रंप को 232 वोट मिले। किसी भी राज्य में मंडल ने अपने पक्ष का साथ नहीं छोड़ा। साथ छोड़ने वाले वोट ‘फेथलैस’ कहलाते हैं। 2016 में ट्रंप को 304 वोट मिले थे, उनके दो वोट फेथलैस हुए थे, हालांकि तब हिलेरी क्लिंटन के खेमे से भी पांच वोट फेथलैस हो गए थे।
इलेक्टोरल कॉलेज का समझें गणित
राष्ट्रपति पद के चुनाव में पॉपुलर वोट के आधार पर जीत नहीं मिलती है। इसके लिए इलेक्टोरल कॉलेज में जीत हासिल करनी पड़ती है। हर राज्य में इलेक्टोरल कॉलेज की संख्या अलग-अलग है। पूरे अमेरिका में कुल 538 इलेक्टोरल कॉलेज होते हैं, जिस उम्मीदवार को 270 या ज्यादा इलेक्टोरल कॉलेज मिलते हैं वह जीत हासिल करता है।
राष्ट्रपति चुनाव के दिन जो वोट दिए जाते हैं उनसे यह तय होता है कि किसी भी राज्य में मौजूद सभी इलेक्टोरल कॉलेज किस उम्मीदवार को मिलेंगे। 270 या इससे अधिक इलेक्टोरल कॉलेज हासिल करने वाले को जीत मिलती है। 306 इलेक्टोरल कॉलेज पर बाइडन का दावा बनता है। 6 जनवरी को इलेक्टोरल कॉलेज के वोट को अमेरिकी कांग्रेस में टैली किया जाएगा। इसमें जिस उम्मीदवार को जीत मिलती है वह अमेरिका का राष्ट्रपति होगा।