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Pakistan: पाक सुरक्षा बलों का खैबर पख्तूनख्वा में खुफिया ऑपरेशन, मुठभेड़ में आठ आतंकवादी ढेर

Mon, 27 Nov 2023 04:04 AM IST
गुलाम अहमद वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेशावर

सार

पाक सेना ने एक बयान में कहा कि आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर खुफिया ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान सैनिकों और आतंकवादियों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें आठ आतंकवादी मारे गए।
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फाइल फोटो - फोटो : Social Media
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विस्तार
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पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दक्षिण वजीरिस्तान जिले में रविवार को एक खुफिया ऑपरेशन के दौरान आठ आतंकवादियों को मार गिराया। पाक सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा कि आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर खुफिया ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान सैनिकों और आतंकवादियों के बीच भारी गोलीबारी हुई। जिसमें आठ आतंकवादी मारे गए।

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बयान में कहा गया है कि मारे गए आतंकी सुरक्षा बलों के साथ-साथ निर्दोष नागरिकों के खिलाफ कई आतंकवादी हमलों में शामिल थे। उनके कब्जे से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक भी बरामद किए गए। पाक सेना ने कहा कि सुरक्षा बल देश से आतंकवाद के खतरे को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। क्षेत्र में आतंकवादियों को खत्म करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

टीटीपी ने पाक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
उधर, प्रतिबंधित आतंकवादी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमे के खिलाफ पाक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। टीटीपी ने कहा कि इस फैसले से सैन्य मुकदमे का सामना कर रहे उसके सदस्यों की रिहाई में मदद मिलेगी। समूह के प्रवक्ता मुहम्मद खुरासानी ने रविवार को सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि अदालत के आदेश से पता चला है कि पाकिस्तान की उच्च न्यायपालिका में देश में इस्लाम विरोधी ताकतों के खिलाफ फैसले लेने का साहस है।
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बयान में खुरासानी ने कहा कि सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने टीटीपी का दिल जीत लिया है। उन्होंने कहा, फैसले ने साबित कर दिया कि सैन्य अदालतों द्वारा 'टीटीपी लड़ाकों' को दी गई सजाएं पक्षपातपूर्ण और अवैध थीं। बयान में कहा गया, देश में इस्लामी व्यवस्था लागू करने के संघर्ष के दौरान टीटीपी को सैन्य अदालतों के अन्याय का शिकार होना पड़ा, क्योंकि उसके कई सदस्यों को सैन्य अदालतों द्वारा कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

बता दें, 23 अक्तूबर को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नौ मई की हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए नागरिकों के खिलाफ सैन्य अदालतों में मुकदमे को रद्द कर दिया था और अधिकारियों को सामान्य अदालतों में ऐसे मामलों की सुनवाई करने का आदेश दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि सेना अधिनियम के तहत गिरफ्तार 102 आरोपियों पर आपराधिक अदालत में मुकदमा चलाया जाए। 
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