ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है और उसके प्रतिनिधि अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान लंबे समय से दुष्प्रचार पर आधारित रणनीति अपनाता रहा है और अब वह इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी इस्तेमाल कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका बातचीत के लिए हमेशा तैयार रहता है और वह हर पक्ष से संवाद करते हैं क्योंकि कई बार इससे सकारात्मक परिणाम निकलते हैं। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की ओर से असल नेतृत्व कौन कर रहा है।
उनका दावा है कि हालिया हमलों में ईरान के कई शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं, जिसके कारण यह तय करना मुश्किल हो गया है कि बातचीत किसके साथ की जाए। उन्होंने कहा कि पहले एक नेतृत्व समूह खत्म हुआ, फिर दूसरा बना और वह भी हमलों में खत्म हो गया। अब तीसरे समूह की बात सामने आ रही है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि उसका नेतृत्व कौन कर रहा है।
AI से फैलाई जा रही झूठी तस्वीरें: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि ईरान लंबे समय से दुष्प्रचार के लिए जाना जाता है और अब उसने इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी जोड़ दिया है। उनके अनुसार, पिछले दो हफ्तों में सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर कई ऐसी तस्वीरें और वीडियो दिखाए गए जिनमें तेल अवीव, कतर और सऊदी अरब की इमारतों को जलते हुए दिखाया गया। ट्रंप ने कहा कि ये सभी दृश्य पूरी तरह से AI से बनाए गए हैं और वास्तविकता से उनका कोई संबंध नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की नौसैनिक ताकत को नुकसान
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान की समुद्री गतिविधियों को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के 30 से अधिक माइन बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। ट्रंप के मुताबिक, ये सभी जहाज अब समुद्र की गहराई में डूब चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग
ट्रंप ने बताया कि इस मुद्दे पर उनकी बातचीत फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से हुई है। उन्होंने कहा कि मैक्रों सहयोग करने के लिए तैयार हैं, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है क्योंकि उसकी सैन्य शक्ति सबसे मजबूत है। ट्रंप ने ब्रिटेन के रुख पर भी नाराजगी जताई और कहा कि सहयोगी देशों को इस मुद्दे पर ज्यादा सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ।उन्होंने कहा कि NATO की सुरक्षा अमेरिका की वजह से बनी हुई है और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अमेरिका और उसकी सेना से डर लगता है, यूरोप से नहीं।