सार
चुनाव आयोग ने बताया कि हालिया उपचुनावों के आंकड़े अब सिर्फ 72 घंटे में ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जारी किए गए। यह रिपोर्ट वोटिंग प्रतिशत, वोट शेयर, लिंग आधारित पैटर्न व पार्टियों के प्रदर्शन जैसे अहम आंकड़े देती है।
चुनाव आयोग ने बुधवार को जानकारी दी कि हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनावों के लिए डिजिटल तकनीक की मदद से आयोग ने 72 घंटे यानी तीन दिन के अंदर चुनावी आंकड़ों के इंडेक्स कार्ड जारी कर दिए हैं। यह काम आयोग ने अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINET के जरिए किया है। बता दें कि इंडेक्स कार्ड चुनाव के बाद तैयार होने वाली एक गैर-कानूनी (नॉन-स्टैच्यूटरी) रिपोर्ट होती है, जो वोटिंग से जुड़े आंकड़ों को समझने में मदद करती है। इस रिपोर्ट के जरिए उम्मीदवारों, मतदाताओं, मतदान प्रतिशत, वोट शेयर, लिंग के हिसाब से वोटिंग पैटर्न, क्षेत्रीय मतभेद और राजनीतिक पार्टियों के प्रदर्शन जैसे कई अहम पहलुओं की जानकारी मिलती है।
इन राज्यों के उपचुनाव में लागू था डिजिटल सिस्टम
चुनाव आयोग ने बताया कि उसने यह नया डिजिटल सिस्टम 19 जून को केरल, गुजरात, पंजाब और पश्चिम बंगाल की पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में पहली बार लागू किया था। इन चुनावों के नतीजे 23 जून को घोषित किए गए थे।
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मतदान प्रतिशत को तेजी से करता है अपडेट
बता दें कि ECINET नाम के इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मतदान के दौरान होने वाले लगभग वोटर टर्नआउट यानी मतदान प्रतिशत के आंकड़ों को तेजी से अपडेट कर पाता है। इससे चुनाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है और आंकड़ों को समय पर समझना आसान हो जाता है।
इस नई तकनीक के जरिए इंडेक्स कार्ड के अधिकांश आंकड़े अपने आप भर जाते हैं, क्योंकि ECINET सिस्टम सीधे डेटा एकत्र करता है। इससे पहले, जब यह डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं था, तो चुनाव अधिकारियों को यह सारे आंकड़े मैनुअल यानी हाथ से भरने और जांचने में कई दिन, हफ्ते या महीने लग जाते थे।
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ECINET के फायदे
वहीं इस डिजिटल सिस्टम के फायदे की बात करें तो चुनाव आयोग का कहना है कि ECINET के आने से न केवल काम जल्दी हो रहा है, बल्कि आंकड़ों की गुणवत्ता भी बेहतर हो गई है। इससे चुनाव परिणामों का विश्लेषण करने वाले लोग जैसे कि राजनीतिक दल, पत्रकार, शोधकर्ता और आम लोग जल्दी और सही जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही इस तरह के डिजिटल सुधार चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जिससे भविष्य के चुनावों में भी समय पर और भरोसेमंद जानकारी मिल सकेगी।