सीईपीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिचर्ड हैचेट ने बताया कि कोरोनो के टीके का चिकित्सकीय परीक्षण तकरीबन 16 हफ्ते में कर लिया जाएगा। जर्मन बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी क्योरवैक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना थेरेप्यूटिक्स भी टीका बनाने में जुटी हैं। ये कंपनियां संदेशवाहक आरएनए (अनुवांशिक गुणों को धारण करने वाला प्रोटीन) के आधार पर टीका तैयार करने में लगी हैं, जबकि एक और अमेरिकी कंपनी इनोवियो डीएनए आधारित तकनीक की मदद ले रही है।
वायरस को उसी के गुणों से मात देगी डीएनए-आरएनए तकनीक
सिंगापुर में ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल में संक्रमित रोग कार्यक्रम के डिप्टी डायरेक्टर ओई एंग ओंग ने बताया कि डीएनए और आरएनए आधारित टीके दरअसल वायरस के जेनेटिक कोड का इस्तेमाल कर शरीर में ऐसी कोशिकाएं विकसित करते हैं जो वायरस जैसा ही प्रोटीन पैदा करते हैं और वायरस को मात देते हैं। ये प्रोटीन वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर लेते हैं और जैसे ही वायरस शरीर में कहीं भी प्रवेश करता है, उस पर हमला बोल देते हैं।
ऑस्टेलियाई शोधकर्ता टीके तैयार करने के लिए मॉलिक्यूलर क्लैंप टेकभनोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह तकनीक वायरस के डीएनए के क्रम को पहचान कर उसके जैसा ही लड़ाकू प्रोटीन तैयार करती है।
पाश्चर इंस्टीट्यूट में फ्रांसीसी वैज्ञानिक चेचक के टीके को कोरोना के खिलाफ तैयार करने में जुटे हैं। हालांकि, वे मानते हैं कि इसमें करीब 20 माह का वक्त लगेगा। वहीं, चीन के रोग रोकथाम और बचाव केंद्र ने भी टीका तैयार करने का काम शुरू कर दिया है।
सार्स के चचेरे भाई कोरोना का ऐसे हो रहा इलाज
कोरोना वायरस के लिए अभी कोई टीका नहीं होने से डॉक्टर भी लाचार साबित हो रहे हैं। हालांकि, कुछ डॉक्टर कोरोना से ग्रस्त मरीजों को जहां एंटी रिट्रोवायरल दवाएं दे रहे हैं तो कुछ फ्लू से संबंधित दवाएं दे रहे हैं। कोरोना को सार्स के वायरस से काफी मिलता-जुलता माना जाता है। इसीलिए इसे सार्स का चचेरा भाई कहा जाता है।