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कोरोनावायरस: संक्रमण के लिए रूसी मीडिया ने अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

Sun, 09 Feb 2020 02:41 PM IST
देव कश्यप वर्ल्ड डेस्क, मॉस्को
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रूसी के ‘चैनल वन’ में कोरोनावायरस पर चर्चा - फोटो : CHANNEL ONE
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चीन में समेत दुनिया भर में फैले कोरोना वायरस के कहर के बीच दुनिया भर में इस बारे में तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। कोरोनावायरस को लेकर कई तरह की कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज (पीछे की साजिश की कहानियां) बताई जा रही हैं। इसके अलावा इंटरनेट पर इससे जुडी कई भ्रामक और गलत जानकारियां भी हैं। लेकिन रूसी मीडिया इससे भी आगे निकल चुका है। रूस में ये सब टीवी पर प्राइम टाइम के समाचार कार्यक्रमों में दिखाया जा रहा है।

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रूस के ‘चैनल वन’ के मुताबिक, चीन में कोरोना वायरस फैलने के पीछे पश्चिमी देशों खासकर अमेरिका की साजिश है। इसमें बताया गया कि कोरोनावायरस के प्रसार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे सौंदर्य प्रतियोगिताओं की अध्यक्षता करते हैं और विजेता को यह क्राउन सौंपते हैं। ‘कोरोना’ शब्द का लैटिन और रूसी भाषा में अर्थ क्राउन (शासक) होता है।

कुल मिलाकर रूसी टीवी चैनलों में कोरोना वायरस के बारे में दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों में जो निष्कर्ष निकाला जा रहा है वो ये है कि इसके पीछे कहीं न कहीं शक्तिशाली पश्चिमी देशों का हाथ है और आखिरकार घूम-फिरकर सारा दोष अमरीका पर आ जाता है। प्रमुख रूसी समाचार चैनलों में से एक 'चैनल वन' ने शाम के अपने मुख्य कार्यक्रम 'वेएम्या' (वक्त) में कोरोना वायरस कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज की चर्चा करने के लिए बाकायदा एक स्लॉट शुरू किया है।
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इस कार्यक्रम में रिपोर्टिंग का तरीका अस्पष्ट सा है। कार्यक्रम कुछ ऐसे दिखाया जाता है जैसे कोरोना वायरस के लिए की जा रही साजिशों का पर्दाफाश कर दिया गया है और दर्शकों पर ऐसा प्रभाव छोड़ने की कोशिश की जाती है जैसे कि उन्हें सच्चाई के सबसे अहम हिस्से से वाकिफ करा दिया गया होगा।

रूसी और लैटिन भाषा में कोरोना का अर्थ ताज या मुकुट होता है। रूसी टीवी चैनल इसी शब्द को बुनते हुए बताते हैं कि कैसे इसमें अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के शामिल होने के संकेत हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि ट्रंप कई सौंदर्य प्रतियोगिताओं में मौजूद रहा करते थे और विजेताओं को ताज पहनाकर सम्मानित करते थे।

कोरोना वायरस नस्लीय हथियार?

सच्चाई तो ये है कि वैज्ञानिकों ने इस वायरस का नाम कोरोना इसलिए रखा क्योंकि इसका आकृति ताज जैसी दिखती है। लेकिन 'वेएम्या' टीवी शो के प्रेजेंटर इससे सहमत होते नहीं दिखते। कोरोना के पीछे ट्रंप की साजिश का जिक्र करते हुए 'वेएम्या' कार्यक्रम का एक प्रेजेंटर कहता है, 'आपको लगेगा हम जो बता रहे हैं वो पूरी तरह बकवास है। मैं भी शायद ऐसा ही कहता अगर हमारे संवाददाता की रिपोर्ट में ये बातें पता न चलतीं।'

कार्यक्रम में एक वीडियो दिखाया जाता है जिसमें प्रेजेंटर खुद कबूल करता है कि ये पूरी थ्योरी थोड़ी अजीब है लेकिन फिर वो एक विशेषज्ञ से मिलवाता है जो बताता है कि कोरोना वायरस को कैसे कृत्रिम रूप से बनाया गया है और कैसे अमरीकी खुफिया एजेंसियां और अमरीकी फार्मा कंपनियां इसके पीछे हैं।

कार्यक्रम में रूसी मीडिया और अधिकारियों की वो पुरानी रिपोर्ट फिर से प्रसारित की जाती है जिसमें बताया गया था कि अमरीका ने जॉर्जिया की एक लैब में बायोलॉजिक हथियार बनाकर इंसानों पर इसका परीक्षण किया था। दिलचस्प बात ये है कि इन पुराने दावों को पहले ही गलत साबित किया जदा चुका है। चैनल वन का एक रिपोर्टर इंटरनेट पर मौजूद एक थ्योरी का भी जिक्र कर रहा है कि कैसे कोरोना वायरस सिर्फ एशियाई लोगों पर असर डाल रहा है और ये एक तरीके का 'नस्लीय हथियार' हो सकता है।

रिपोर्टर खुद ये स्वीकार करता है कि कोरोना वायरस के नस्लीय हथियार होने की बात को गलत साबित करने के लिए स्पष्ट साक्ष्य हैं, लेकिन फिर वो कहता है, 'जागरूक विशेषज्ञों का भी मानना है कि अभी किसी भी तरह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।'

 

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पुतिन से मिलने वालों का मेडिकल चेकअप

कोरोना वायरस से जुडे इस तरह के दावों के बारे में चैनल वन के कार्यक्रम में वेरेम्या में जोर-शोर से चर्चा की जाती है। इन चर्चाओं का निष्कर्ष ये होता है कि कोराना वायरस के पीछे कहीं न कहीं पश्चिमी शक्तियां हैं जैसे कि- फार्मा कंपनियां, अमरीका या इसकी खुफिया एजेंसियां हैं। कार्यक्रमों में ये बताने की कोशिश की जा रही है कि पश्चिमी शक्तियां कहीं न कहीं कोरोना वायरस का संक्रमण फैलाने और इस बारे में घबराहट बढ़ाने में मदद कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि फार्मा कंपनियों के ऐसा करने के पीछे कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाकर इससे बड़ा मुनाफा कमाने की चाल हो सकती है और अमरीका के ऐसा करने के पीछे अपने प्रतिद्वंद्वी चीन की अर्थव्यवस्था कमजोर करने का इरादा। टीवी चैनलों से दूर चलें तो रूसी अधिकारियों के लिए कोरोना वायरस एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

देश में चीन के एयर और रेल ट्रैफिक को रोक दिया गया है। चीन में फंसे रूसी लोगों को निकालकर दो हफ्तों के लिए साइबेरिया के एक स्वास्थ्य केंद्र में रखा गया है। मॉस्को की एक चर्च में तो कोरोना वायरस से मोक्ष दिलाने के लिए एक प्रार्थना सभा का आयोजन भी किया गया।

ऐसा डर जताया जा रहा है कि कोरोना वायरस से रूस के बड़े अधिकारियों को संक्रमित करने की साजिश है। रूसी अखबार 'वेदेमोस्ती' की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन से मिलने वाले अधिकारियों का मेडिकल चेकअप अनिवार्य कर दिया है। राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसे 'ऐहतियाती कदम' बताया है।

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