कहां है भूकंप का सबसे ज्यादा खतरा?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत में सबसे अधिक भूकंप का खतरा किन राज्यों को है?
भारत में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, सिक्किम, असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भूकंप का सबसे अधिक खतरा है। इसके अलावा गुजरात का कच्छ क्षेत्र और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह भी अत्यधिक संवेदनशील हैं। भारत को भूकंपीय जोखिम के आधार पर चार जोन में बांटा गया है। जोन-5 को सबसे खतरनाक माना जाता है, जहां बड़े भूकंप आने की संभावना अधिक रहती है।
दुनिया के सबसे भूकंप प्रभावित देश कौन-कौन से हैं?
जापान, इंडोनेशिया, चिली, तुर्किये, ईरान, नेपाल, मेक्सिको और न्यूजीलैंड दुनिया के सबसे भूकंप प्रभावित देशों में शामिल हैं। ये देश टेक्टोनिक प्लेटों के किनारों पर स्थित हैं, जहां प्लेटों की लगातार हलचल होती रहती है। जापान और इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में आते हैं, जहां दुनिया के सबसे अधिक भूकंप और ज्वालामुखी सक्रिय रहते हैं। इसी कारण इन देशों में अक्सर बड़े और विनाशकारी भूकंप आते हैं।
हर साल भूकंप से कितनी मौतें होती हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्ष 1998 से 2017 के बीच दुनिया भर में आए भूकंपों से करीब 7.5 लाख लोगों की मौत हुई। इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं से हुई कुल मौतों में आधे से अधिक मौतें अकेले भूकंप की वजह से हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप दुनिया की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक है, क्योंकि यह बिना किसी पूर्व चेतावनी के आता है।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, हर साल भूकंपों से औसतन चालीस हजार लोगों की जान जाती है। अलग-अलग वर्षों में यह संख्या कम या ज्यादा हो सकती है, क्योंकि किसी एक बड़े और विनाशकारी भूकंप से मौतों का आंकड़ा अचानक बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर निर्माण, अर्ली वार्निंग सिस्टम और आपदा प्रबंधन के जरिए इन मौतों की संख्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इतिहास के सबसे विनाशकारी भूकंप कौन से रहे?
1960 में चिली में आया 9.5 तीव्रता का भूकंप अब तक का सबसे शक्तिशाली भूकंप माना जाता है। 2004 में हिंद महासागर में आए भूकंप और सुनामी में 2.3 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 2010 के हैती भूकंप में भी लाखों लोग प्रभावित हुए थे। 2011 में जापान में आए 9.0 तीव्रता के भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा परमाणु संकट को जन्म दिया था।
| वर्ष |
स्थान |
तीव्रता |
अनुमानित मौतें |
| 1960 |
चिली |
9.5 |
हजारों |
| 2004 |
हिंद महासागर |
9.1 |
2.3 लाख से अधिक |
| 2010 |
हैती |
7.0 |
2 लाख से अधिक |
| 2011 |
जापान |
9.0 |
18,000 से अधिक |
रिंग ऑफ फायर क्या है?
रिंग ऑफ फायर प्रशांत महासागर के चारों ओर फैला एक विशाल भूवैज्ञानिक क्षेत्र है। यहां दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत सक्रिय ज्वालामुखी और 90 प्रतिशत भूकंप दर्ज किए जाते हैं। यह क्षेत्र कई टेक्टोनिक प्लेटों के मिलने का स्थान है, जिसके कारण यहां लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं। जापान, इंडोनेशिया, चिली और अमेरिका का पश्चिमी तट इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
क्या जलवायु परिवर्तन का भूकंप से कोई संबंध है?
अधिकांश वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बड़े प्राकृतिक भूकंपों के बीच सीधा संबंध नहीं है। भूकंप मुख्य रूप से पृथ्वी के भीतर टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण आते हैं। हालांकि, बड़े बांध, खनन, तेल और गैस की ड्रिलिंग जैसी मानवीय गतिविधियां कुछ छोटे भूकंपों को प्रभावित कर सकती हैं। इस विषय पर अभी भी वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।
भूकंप के बाद सुनामी का खतरा कब पैदा होता है?
जब समुद्र के भीतर बहुत शक्तिशाली भूकंप आता है और समुद्र की सतह अचानक ऊपर या नीचे खिसकती है, तब सुनामी की लहरें पैदा हो सकती हैं। ये लहरें सैकड़ों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तटों की ओर बढ़ती हैं और भारी तबाही मचा सकती हैं। हर समुद्री भूकंप सुनामी नहीं लाता, लेकिन 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले उथले समुद्री भूकंपों के बाद सुनामी का खतरा बढ़ जाता है।