स्टॉकहोम में ईयू-इंडो पैसिफिक मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए, एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण से, मुझे इंडो-पैसिफिक महासागरों की पहल को भी हरी झंडी दिखानी चाहिए।
एस जयशंकर दूसरे ईयू इंडो-पैसिफिक मिनिस्ट्रियल फोरम (ईआईपीएमएफ) में भाग लेने के लिए स्वीडन के विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली यात्रा पर शनिवार को स्टॉकहोम पहुंचे। स्टॉकहोम की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, ईयू-इंडो पैसिफिक मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित किया।
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उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ, इंडो-पैसिफिक और भारत को विशेष रूप से नियमित, व्यापक और स्पष्ट वार्ता की आवश्यकता है, जिस पर उन्होंने जोर दिया कि यह केवल दिन के संकट तक ही सीमित नहीं है। आगे कहा कि भारत में हो रहे बदलावों पर यूरोपीय संघ का ध्यान जाएगा।
स्टॉकहोम में ईयू-इंडो पैसिफिक मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए, एस जयशंकर ने कहा कि भारतीय दृष्टिकोण से, मुझे इंडो-पैसिफिक महासागरों की पहल को भी हरी झंडी दिखानी चाहिए, जिसे हमने 2019 में प्रस्तावित किया था। यूरोपीय संघ अपने उद्देश्यों के साथ सहज होगा और अपने किसी स्तंभ में भागीदारी करने पर विचार कर सकता है।
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इससे पहले जयशंकर ने ट्वीट किया कि ढाका से स्टॉकहोम तक, अभी भी इंडो-पैसिफिक पर चर्चा हो रही है। ईयू इंडो-पैसिफिक मिनिस्ट्रियल के लिए स्वीडन पहुंचे। उन्होंने कहा कि ईयू-इंडो-पैसिफिक मिनिस्ट्रिया में सिंगापुर के विदेश मंत्री को देखकर अच्छा लगा। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह जयशंकर की विदेश मंत्री के रूप में उनकी पहली यात्रा होगी और ऐसे समय में होगी जब भारत और स्वीडन राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 साल मना रहे हैं।
स्वीडन व भारत और मजबूत करेंगे संबंध
स्वीडन में आयोजित होने वाली दूसरी यूरोपीय संघ, हिंद-प्रशांत मंत्रिस्तरीय (ईआईपीएमएफ) बैठक में भाग लेने विदेश मंत्री जयशंकर शनिवार को स्टॉकहोम पहुंचे। विदेश मंत्री के रूप में जयशंकर की पहली स्वीडन यात्रा है। शनिवार को उन्होंने स्वीडन के विदेश मंत्री टोबियास बिलस्ट्रॉम से मुलाकात की और भारत, यूरोप और अमेरिका के त्रिपक्षीय फोरम के उद्घाटन सत्र भाग लिया। जयशंकर की स्वीडन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे कर रहे हैं। एजेंसी