ब्रिटेन, फ्रांस और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है। संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन की स्थायी प्रतिनिधि डेम बारबरा वुडवर्ड ने बुधवार को कहा, जैसा कि ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने इस हफ्ते सार्वजनिक रूप से दोहराया है, हम भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान के लिए यूएनएससी में नए स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं। संयोग से भारत इस महीने यूएनएससी की अध्यक्षता कर रहा है।
यूएन में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत निकोलस डी रिविएरे ने कहा, दुनिया की उभरती नई ताकतों को ध्यान में रखते हुए हम सुरक्षा परिषद के विस्तार का समर्थन करते हैं। फ्रांस स्थायी सदस्यता के लिए भारत, ब्राजील, जर्मनी व जापान की उम्मीदवारी का समर्थन करता है। इस बीच, सुरक्षा परिषद में एक बहस के दौरान यूएई की मंत्री नौरा बिंत मोहम्मद अल काबी ने कहा, आपको और भारतीय मिशन को सुक्षा परिषद के 8वें सफल कार्यकाल के लिए बधाई। यूएई यूएनएससी की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को समर्थन दोहराता है।
यूएई ने भी समर्थन का वादा दोहराया
संयुक्त अरब अमीरात ने सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के अपने समर्थन को दोहराया। संयुक्त अरब अमीरात के मंत्री नौरा बिंत मोहम्मद अल काबी ने ‘अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा तथा सुधारित बहुपक्षवाद के लिए नई दिशा’ पर यूएनएससी ओपन डिबेट में भाग ले रही थीं। इस दौरान भारत के समर्थन की बात कही।
महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। एस जयशंकर और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र लॉन में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर बताया कि यूएनएससी में सुधार और यूक्रेन संघर्ष पर उनकी अंतर्दृष्टि को महत्व दिया। साथ ही भारत के जी20 अध्यक्षता के दौरान साथ काम करने पर विचारों का आदान-प्रदान किया। विदेश मंत्री जयशंकर ने 'मेंटेनेंस ऑफ इंटरनेशनल पीस एंड सिक्योरिटी: न्यू ओरिएंटेशन फॉर रिफॉर्म मल्टीलेटरलिजम' पर यूएनएससी के सत्र का नेतृत्व किया।
भारत दिसंबर 2022 महीने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि आज जब विश्व हिंसा, शस्त्र संघर्ष और मानवीय आपात स्थिति का सामना कर रहा है। महात्मा गांधी के आदर्श विश्व में शांति और स्थिरता स्थापित करने में हमारा मार्गदर्शन कर सकते हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि यह बहस और इसका परिणाम न केवल यह निर्धारित करने में मदद करेगा कि हम किस प्रकार का संयुक्त राष्ट्र देखना चाहते हैं, बल्कि ये वैश्विक व्यवस्था भी है जो समकालीन वास्तविकताओं को सर्वोत्तम रूप से दर्शाती है।
विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर ने कहा कि 77वें UNGA में हम सभी रिफॉर्म के पक्ष में बढ़ती भावना के साक्षी रहे। हमारी चुनौती इसे ठोस परिणामों में बदलना है। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद की चुनौती पर विश्व के ज्यादातर देशों के द्वारा एक साथ आगे आकर सामूहिक प्रतिक्रिया दी जा रही है, लेकिन बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग अपराधियों को न्यायोचित ठहराने और उन्हें बचाने के लिए किया जा रहा है।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को उचित ठहराने और साजिशकर्ताओं को बचाने के लिए बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
यूएनएससी में ‘अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा तथा सुधारित बहुपक्षवाद के लिए नई दिशा’ विषय पर खुली बहस की अध्यक्षता करते हुए जयशंकर ने यह भी कहा कि संघर्ष ने ऐसी स्थिति बना दी है कि बहुपक्षीय मंच पर चलताऊ रवैया नहीं रखा जा सकता। आतंकवाद की चुनौती पर दुनिया अधिक एकजुट प्रतिक्रिया के साथ एक साथ आ रही है। हालांकि, साजिशकर्ताओं को उचित ठहराने और बचाने के लिए बहुपक्षीय मंचों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
दरअसल, चीन ने पाकिस्तान के जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर जैसे आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने के लिए कई मौकों पर भारत और अमेरिका के प्रयासों में रोड़ा बनने की कोशिश की है। जयशंकर परोक्ष रूप से इसी का जिक्र कर रहे थे।
इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष साबा कोरोसी से मुलाकात की और भारत के जी20 अध्यक्षता लक्ष्यों और बहुपक्षवाद में सुधार के महत्व पर चर्चा की। जयशंकर ने एक ट्वीट में कहा, न्यूयॉर्क में साबा कोरोसी से मिलकर खुशी हुई। हमारे यूएनएससी अनुभव, हमारे जी-20 प्रेसीडेंसी लक्ष्यों और बहुपक्षवाद के महत्व पर चर्चा की।