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कोरोना वायरस ने बिगाड़ी पुतिन की राजनीतिक योजना, 22 अप्रैल को होने वाला जनमत संग्रह टला

Mon, 13 Apr 2020 04:11 PM IST
श्रीधर मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को
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व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)
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रूस में संवैधानिक संशोधनों को आखिरी रूप देने के लिए 22 अप्रैल को होने वाला जनमत संग्रह टल गया है। दरअसल कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पैदा हुए हालातों को देखते हुए इसे टाल दिया गया है। इसके कारण रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के राजनीतिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि ये संवैधानिक संशोधन व्लादिमीर पुतिन को 2036 तक सत्ता में रहने की अनुमति देंगे।
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कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए जनमत-संग्रह को स्थगित किया गया है। इसके अलावा दूसरे विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी की 1945 की हार की याद में नौ मई को मनाए जाने वाले विजय दिवस समारोह की भी टलने की संभावना बढ़ गई है।

दरअसल शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी को रूसी प्रशासन और अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन अब कोविड-19 संक्रमण पुतिन के लिए अप्रत्याशित चुनौती बन गया है। ऐसे में पुतिन की राजनीतिक लोकप्रियता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस संक्रमण को काबू कर पाते हैं या नहीं।
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यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुतिन को साल 2024 के बाद भी दो और कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की अनुमति देने वाले संशोधन को संसद से पहले ही अनुमति मिल चुकी है, लेकिन इस पर सरकार जनमत संग्रह कराना चाहती है।

चाथम हाउस के रूसी और यूरेशिया कार्यक्रम के वरिष्ठ अनुसंधानकर्ता निकोलई पेत्रोव ने बताया है कि संक्रमण के चलते मध्य जनवरी से चल रहा पूरा राजनीतिक एजेंडा खत्म हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘इस समय मुझे लगता है कि हम संवैधानिक संशोधन को भूल सकते हैं।’’

बता दें कि रूस में कोरोना वायरस महामारी से 18,000 से अधिक लोग संक्रमित हैं। वहीं, इस खतरनाक वायरस से यहां 140 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में कोरोना वायरस दुनिया के दूसरे देशों की तरह रूस में भी तांडव न मचाए इसके लिए अब कई जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
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