यदि हम जलवायु परिवर्तन का सामना करने में विफल रहते हैं, तो गर्म हवा के कारण होने वाली मौतों के आंकड़े का स्तर साल 2080 तक बढ़ सकता है। ऐसा विशेषरूप से भारत जैसे भूमध्य रेखा के पास स्थित देशों में होने की संभावना है। एक वैश्विक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है।
‘जर्नल पीएलओएस मेडिसिन’ में प्रकाशित अध्ययन में भविष्य में लू से संबंधित मौतों की भविष्यवाणी करने वाला पहला अध्ययन है और इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के लिए अनुकूल निर्णय लेने और उचित योजना बनाए जाने में मदद करना है।
अध्ययन की एक प्रमुख खोज से यह भी पता चला है कि ब्रिस्बेन, सिडनी और मेलबर्न, तीन ऑस्ट्रेलियाई शहरों में 1971-2010 तक गर्मी से होने वाली मौतों में 471 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।