ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक नक्शे ने उत्तर अटलांटिक में विवाद खड़ा कर दिया है। नक्शे में पूरा उत्तरी अमेरिका अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया और ग्रीनलैंड तथा आइसलैंड को भी इसमें शामिल किया गया। ट्रंप ने इसके साथ कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। डेनमार्क ने इसे अनुचित बताया, जबकि आइसलैंड ने अमेरिकी राजदूत को बैठक के लिए बुलाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पर नक्शा बनाने की नई कवायद ने उत्तर अटलांटिक में हलचल बढ़ा दी है। लंबी छुट्टी वाले सप्ताहांत के दौरान सोशल मीडिया पर कई पोस्ट करते हुए ट्रंप ने एक नक्शा साझा किया। इसमें पूरा उत्तरी अमेरिका यूएस के हिस्से के तौर पर दिखाया गया था। साथ ही ग्रीनलैंड और आइसलैंड भी इसमें शामिल थे। नक्शे को अमेरिकी झंडे के लाल, सफेद और नीले रंगों से सजाया गया था।
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ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए गए इस नक्शे के साथ कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। हालांकि, इससे उनके कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने और डेनमार्क के स्वशासित क्षेत्र ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बार-बार की गई बातों की याद ताजा हो गई।
डेनमार्क ने ट्रंप के पोस्ट पर खड़े किए सवाल
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने मंगलवार को राष्ट्रीय प्रसारक डीआर से कहा, "यह परेशान करने वाला है और कई मायनों में पूरी तरह अनुचित है। यह स्पष्ट रूप से इस बात का संकेत है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के मन में अभी भी किसी तरह की अधिकतम विस्तार वाली सोच है। हमें इसे रोकना होगा।"
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आइसलैंड ने अमेरिकी राजदूत को किया तलब
आइसलैंड की विदेश और रक्षा मंत्री थोरगेरदुर कैटरीन गुन्नार्सदोतिर ने अमेरिकी राजदूत बिली लॉन्ग को बैठक के लिए बुलाया। राष्ट्रीय प्रसारक आरयूवी ने यह जानकारी दी। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की बयानबाजी इस साल की शुरुआत में तेज होने के बाद से आर्कटिक क्षेत्र के देश सतर्क हैं। ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होने की बात को लेकर कई बार बयान दिए हैं।
कहां से शुरू हुआ आइसलैंड का विवाद?
अमेरिका से सिर्फ 180 मील यानी करीब 290 किलोमीटर दूर स्थित आइसलैंड में कुछ लोगों की चिंता उस समय बढ़ गई थी, जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी योजनाओं पर बात करते हुए गलती से चार बार आइसलैंड का नाम लिया था। आइसलैंड नाटो का सदस्य है।
ट्रंप की इस गलती के बाद वहां की वामपंथी गठबंधन सरकार ने एक जनमत संग्रह पहले कराने का फैसला किया। इसमें यह तय किया जाना था कि देश को यूरोपीय संघ का सदस्य बनने के लिए लंबे समय से रुकी बातचीत फिर शुरू करनी चाहिए या नहीं।
30 अगस्त को मतदाताओं ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसे आगे बढ़ाने वालों में से कुछ का कहना था कि इससे यूरोप के साथ संबंध मजबूत होंगे और देश को भू-राजनीतिक अस्थिरता से बेहतर तरीके से बचाने में मदद मिलेगी।
अमेरिकी राजदूत के बयान पर भी हुआ था विवाद
हजारों आइसलैंडवासियों ने प्रधानमंत्री से अमेरिकी राजदूत बिली लॉन्ग को अस्वीकार करने की मांग वाली याचिका पर हस्ताक्षर भी किए थे। लॉन्ग ने इस साल की शुरुआत में मजाक करते हुए कहा था कि आइसलैंड अमेरिका का 52वां राज्य बन सकता है और वह उसके गवर्नर बन सकते हैं। बाद में लॉन्ग ने अपने बयान के लिए माफी मांगी और पिछले महीने रेक्याविक में अमेरिकी राजदूत के तौर पर कार्यभार संभाला।
कनाडा को लेकर भी ट्रंप के बयानों से तनाव
ट्रंप कनाडा को अमेरिका का राज्य बनाने की बार-बार बात करके कनाडा में भी नाराजगी पैदा कर चुके हैं। उन्होंने कनाडा के साथ व्यापार युद्ध शुरू किया और हाल ही में ओंटारियो झील का नाम बदलकर "लेक अमेरिका" करने की बात भी कही। श्रम दिवस वाले सप्ताहांत में ट्रंप का ध्यान सिर्फ दुनिया के नक्शे तक सीमित नहीं था। उन्होंने अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको का नाम बदलकर "न्यू अमेरिका" करने का सुझाव भी दिया।