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ट्रंप की धमकी-हमले की हिमाकत की तो तबाह कर देंगे, ईरान बोला-डरपोक है अमेरिका

Sun, 05 Jan 2020 02:21 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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Donald Trump - फोटो : PTI
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अमेरिकी हवाई हमले में ईरान के सबसे ताकतवर सैन्य जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद पूरे मध्य पूर्व युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। सुलेमानी की हत्या के बाद इराक स्थित अमेरिकी ठिकानों पर राकेट दागे जाने की घटना के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, अगर ईरान ने किसी अमेरिकी ठिकाने या किसी अमेरिकी पर हमला करने की कोशिश की तो हम उसके 52 ठिकानों को एक झटके में तबाह कर देंगे। ये ईरान और ईरानी संस्कृति के लिए काफी अहमियत रखते हैं।

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ईरान ने फिर हमले की हिमाकत की तो हम अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करेंगे। वहीं, अमेरिका को फटकार लगाते हुए ईरानी सेना ने कहा है कि अमेरिका डरपोक है। उसमें यह हिम्मत नहीं है कि वह आमने-सामने की लड़ाई लड़ सके। सरकारी समाचार एजेंसी इरना के हवाले से मेजर जनरल अब्दुल रहीम मौसवी ने यह बयान जारी किया है।

इस बीच, ब्रिटेन ने होर्मुज की खाड़ी में शाही नौसेना के दो जंगी पोतों को रवाना कर दिया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वॉलेस ने कहा, अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एचएमएस मॉन्ट्रोस और एचएमएस डिफेंडर को भेजा गया है। शाही नौसेना की परमाणु हथियारों और टॉमहॉक मिसाइलों से लैस पनडुब्बी खाड़ी में पहले से ही तैनात है, जिसमें किसी इमारत को ध्वस्त करने की क्षमता है। इस बीच, जनरल सुलेमानी का शव रविवार को ईरान लौट आया है।
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इससे पहले ट्रंप ने कई ट्वीट में कहा, हम किसी भी तरह के हमले का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने (ईरान ने) हम पर हमला किया और हमने जवाबी हमला किया। यदि वे फिर हमला करते हैं, तो हम उन पर अब तक का सबसे जोरदार हमला करेंगे। मैं उन्हें कोई हमला नहीं करने की सलाह देता हूं। अगर हमला हुआ तो हम उन्हें ऐसा जवाब देंगे, जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा।

राष्ट्रपति ने कहा, हमारे पास दुनिया की सबसे बड़ी और बेहतर सेना है। अमेरिका ने सैन्य उपकरणों पर 2000 अरब डॉलर खर्च किए हैं। हम दुनिया में सबसे बड़े और सर्वश्रेष्ठ हैं। यदि ईरान हमारे सैन्य अड्डे या किसी अमेरिकी पर हमला करता है तो हम अपने कुछ एकदम नए खूबसूरत उपकरण.. बिना किसी हिचकिचाहट के उनके खिलाफ इस्तेमाल करेंगे। ट्रंप ने यह बयान उस वक्त दिया, जब ईरान समर्थक गुटों ने इराक के बगदाद स्थित अमेरिकी दूतावास और अल-बालाद एयरबेस पर शनिवार देर रात दो रॉकेट दागे। यहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। 

 

ऐसा मुंहतोड़ जवाब देंगे जैसा उन्होंने पहले कभी देखा नहीं होगा

हम किसी भी तरह के हमले का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। अगर हमला हुआ तो हम उन्हें ऐसा जवाब देंगे, जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा होगा। -डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका



सही समय पर सुलेमानी की हत्या का बदला लेंगे: ईरान

सुलेमानी की हत्या का बदला लेने के लिए हमारा देश सही समय और सही जगह का इंतजार करेगा। हम अमेरिकी कार्रवाई का बदला लेने के लिए जोरदार पलटवार करेंगे। -अब्दुल रहीम मौसवी, मेजर जनरल, ईरान


हम चाहते हैं मामला सुलझ जाए: व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस के सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप स्पष्ट करना चाहते हैं कि जिस रास्ते पर ईरानी चल रहे हैं वह बहुत ही गलत है। हम चाहते हैं कि मामला सुलझ जाए। अगर वे अमेरिका के खिलाफ जाएंगे तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।’ वहीं, अमेरिका के एक पूर्व सुरक्षा अधिकारी ने लिखा, ‘मेरे लिए यह विश्वास करना कठिन है कि पेंटागन ट्रंप को उन जगहों के बारे में बताएगा, जो ईरान की संस्कृति से जुड़े हुए हैं। किसी सांस्कृतिक साइट पर हमला करना एक युद्ध अपराध है।’

मैक्रों ने पुतिन और एर्दोआन से फोन पर की बात
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्र्दोआन से साथ फोन पर पश्चिमी एशिया की स्थिति पर बात की। तीनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई और विभिन्न पक्षों से संयम से काम लेने की अपील की। वहीं, ब्रिटेन के विदेश दूत डॉमनिक राब ने विभिन्न पक्षों से अपील की है कि सुलेमानी की मौत के बाद टकराव की स्थिति को कम करने का प्रयास करें। मुठभेड़ हमारे हित के अनुरूप नहीं है।

भारत में रह रहे अमेरिकियों को लेकर एडवाइजरी
तनाव को देखते हुए भारत में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। अमेरिकी दूतावास की ओर से जारी बयान में कहा गया, मध्य पूर्व में तनाव बढ़ गया है जिसके परिणामस्वरूप अमेरिकी नागरिकों को विदेशों में सुरक्षा जोखिम हो सकता है। अमेरिकी दूतावास के कर्मियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपने आसपास के बारे में जागरूक रहें, विरोध प्रदर्शन से बचें और स्थानीय मीडिया आउटलेट की निगरानी करें।

मध्य पूर्व में कहां और कितनी हैं अमेरिकी सेनाएं
तुर्की:   2,500
सीरिया: 8,00
इराक:  6,000
जॉर्डन: 3,000
कुवैत: 13,000
बहरीन: 7,000
कतर: 13,000
यूएई: 5,000
ओमान: 606
अफगानिस्तान: 14,000
(स्रोत: फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स, इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप)

ईरानी हैकरों ने अमेरिकी सरकारी वेबसाइट हैक करने का दावा किया

ईरान के हैकर होने का दावा करने वाले एक समूह ने एक अमेरिकी सरकारी एजेंसी की वेबसाइट हैक कर ली और शीर्ष ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने का संकल्प लेते हुए एक संदेश इस पर पोस्ट किया।

फेडरल डिपोजिट्री लाइब्रेरी प्रोग्राम की वेबसाइट पर हैकरों ने ईरानियन हैकर्स नाम से पेज डाला और उस पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनी और ईरानी झंडे की तस्वीर लगा दी। हैकरों ने वेबसाइट पर लिखा, सुलेमानी के अथक प्रयासों का पुरस्कार.... शहादत थी।

वेबसाइट पर लिखा गया कि उनकी रवानगी और ईश्वर की ताकत से उनका काम और मार्ग बंद नहीं होगा और उनके एवं अन्य शहीदों के खून से अपने गंदे हाथों को रंगने वाले अपराधियों से बदला लिया जाएगा। पेज पर सफेद पृष्ठभूमि में कैप्शन लिखा गया कि यह ईरान की साइबर क्षमता का एक मामूली हिस्सा है।
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सुलेमानी को 9/11 के हमलावरों से जोड़ने पर पेंस को आलोचकों ने घेरा

अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने दावा किया है कि इराक में शुक्रवार को अमेरिकी हमले में मारे गए ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी ने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए घातक हमले में आतंकवादियों की मदद की थी। पेंस के इस दावे को लेकर अमेरिकी मीडिया ने उन्हें घेरा।

पेंस ने शुक्रवार को ट्वीट किया कि सुलेमानी ने अमेरिका में 11 सितंबर के आतंकवादी हमलों को अंजाम देने वाले 12 आतंकवादियों में से 10 की अफगानिस्तान की गुप्त यात्रा में मदद की थी। 

जब ट्विटर पर आलोचकों ने उनको निशाना बनाना शुरू किया कि 2001 के आतंकवादी हमले में 19 आतंकवादी शामिल थे, तो इस पर पेंस की प्रवक्ता केटी वाल्डमैन ने स्पष्ट किया कि पेंस केवल उन 12 आतंकवादियों का उल्लेख कर रहे थे, जो अफगानिस्तान के जरिये यहां पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि उन 12 में से 10 की सुलेमानी ने सहायता की थी।
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