पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान पर अमेरिकी सैन्य दबाव तब तक जारी रहेगा, जब तक दोनों देशों के बीच 100 फीसदी व्यापक और अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते।
कब हटेगा सैन्य दबाव?
एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए के कार्यक्रम में ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी आंशिक या अंतरिम डील से संतुष्ट नहीं होगा। उनके मुताबिक, फुल एंड फाइनल समझौता ही एकमात्र शर्त है, जिसके बाद ही सैन्य दबाव, जिसमें नेवल ब्लॉकेड और क्षेत्रीय सैन्य मौजूदगी शामिल है, उन्हें हटाया जाएगा।
ट्रंप का यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका की मैक्सिमम प्रेशर रणनीति अभी जारी रहेगी, ताकि ईरान को परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गतिविधियों और सुरक्षा मुद्दों पर व्यापक समझौते के लिए मजबूर किया जा सके।
होर्मुज स्ट्रेट और रणनीतिक दबाव
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब खुला है और वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित है। यह दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा कॉरिडोर माना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और दबाव में कोई कमी नहीं आएगी।
क्या है न्यूक्लियर डस्ट?
अपने बयान में ट्रंप ने न्यूक्लियर डस्ट को अमेरिका वापस लाने की योजना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, यह ईरान में पहले हुए अमेरिकी हमलों या परमाणु गतिविधियों से जुड़ा अवशेष (रेडियोधर्मी मलबा) है।
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक न्यूक्लियर डस्ट कोई औपचारिक या मान्यता प्राप्त तकनीकी शब्द नहीं है। आम तौर पर इसका मतलब परमाणु विस्फोट या गतिविधि के बाद बचने वाले रेडियोधर्मी कणों से लगाया जा सकता है। ऐसे पदार्थ को निकालना और सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना बेहद जटिल और जोखिम भरा होता है, जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी और वैज्ञानिक प्रोटोकॉल जरूरी होते हैं।
ट्रंप ने इसके लिए संयुक्त खुदाई ऑपरेशन का सुझाव दिया है, लेकिन इस तरह के किसी भी कदम के लिए ईरान की सहमति और वैश्विक संस्थाओं की भूमिका अहम होगी।
सीजफायर को लेकर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका के प्रयासों से पश्चिम एशिया में तनाव कुछ हद तक कम हुआ है। इस्राइल और लेबनान के बीच एक ऐसा सीजफायर हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा डेवलपमेंट 78 वर्षों में नहीं हुआ था।