अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत उन्होंने अमेरिका द्वारा की जाने वाली लगभग सभी विदेशी फंडिंग पर रोक लगा दी है। ट्रंप के इस फैसले का पाकिस्तान पर बड़ा असर होगा और पाकिस्तान में अमेरिकी सहायता से चल रहे कई अहम प्रोजेक्ट का काम रुक सकता है।
पाकिस्तान के इन प्रोजेक्ट्स को लगेगा धक्का
अमेरिका अपने प्रोजेक्ट यूएस एड (United States Agency For International Development (USAID)) के जरिए पाकिस्तान में कई योजनाओं की फंडिंग करता है। इनमें एंबेसडर फंड फॉर कल्चरल प्रिजर्वेशन के जरिए पाकिस्तान में सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देना शामिल है। इसमें अमेरिका, पाकिस्तान में स्थित ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण, म्यूजियम और अन्य सांस्कृतिक और भाषा आदि के अध्ययन और विकास में मदद करता है। अब ट्रंप के आदेश के बाद इस मद में पाकिस्तान को अमेरिकी मदद मिलनी बंद हो जाएगी।
अमेरिका पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में भी मदद करता है, जिनमें पावर सेक्टर सुधार गतिविधि, पाकिस्तान निजी क्षेत्र ऊर्जा गतिविधि, ऊर्जा क्षेत्र सलाहकार सेवा प्रोजेक्ट, स्वच्छ ऊर्जा गारंटी योजना और पाकिस्तान जलवायु वित्त गतिविधि आदि प्रोजेक्ट शामिल हैं। ट्रंप के आदेश के बाद पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र को बड़ा धक्का लग सकता है और इन प्रोजेक्ट का काम रुक सकता है।
अमेरिका, पाकिस्तान में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कई कार्यक्रमों को आर्थिक मदद देता रहा है। साथ ही स्वास्थ्य, कृषि, आजीविका, जलवायु, शिक्षा, मानवाधिकार, प्रशासनिक फंडिंग और खाद्य सुरक्षा जैसे अहम क्षेत्रों में भी पाकिस्तान को अमेरिका की आर्थिक मदद मिलती रही है, लेकिन ट्रंप द्वारा विदेशी फंडिंग रोकने के आदेश के बाद ये सब प्रोजेक्ट फिलहाल बंद हो जाएंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से कई प्रोजेक्ट के हमेशा के लिए बंद होने का खतरा है।
समीक्षा के फैसला लेगी अमेरिकी सरकार
गौरतलब है कि अमेरिकी फंडिंग रुकने से पाकिस्तान में कुल कितने प्रोजेक्ट्स का काम रुकेगा, अभी इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है। ये भी साफ नहीं है कि अमेरिका, पाकिस्तान को हर साल कितनी आर्थिक मदद करता है। हालांकि ये साफ है कि ट्रंप के आदेश से पहले से ही आर्थिक संकटों से घिरे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगेगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका की सरकार ने फिलहाल पूरी दुनिया में अपनी फंडिंग रोक दी है और अब समीक्षा के बाद तय होगा कि कौन सी फंडिंग को जारी रखा जाएगा और किसे हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। अमेरिका के विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि समीक्षा इस आधार पर की जाएगी कि जो फंडिंग हो रही है, क्या उससे अमेरिका सुरक्षित होगा? क्या उससे अमेरिका मजबूत होगा? और क्या अमेरिका इससे समृद्ध होगा?