व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि 'वॉयस ऑफ अमेरिका वर्षों से देश के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहा। यह कट्टरपंथी अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है और विभाजनकारी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा दे रहा है।'
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार द्वारा वित्तपोषित समाचार एजेंसी वॉयस ऑफ अमेरिका को बंद करने का आदेश दिया है। ट्रंप ने समाचार एजेंसी पर पक्षपाती होने का आरोप लगाया। व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि 'वॉयस ऑफ अमेरिका वर्षों से देश के साथ तालमेल बिठाने में विफल रहा। यह कट्टरपंथी अमेरिका का प्रतिनिधित्व करता है और विभाजनकारी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा दे रहा है।'
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'अमेरिकी करदाताओं पर बोझ'
ट्रंप ने शुक्रवार को सात सरकारी कार्यालयों को बंद करने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें वॉयस ऑफ अमेरिका (VOA) और रेडियो फ्री यूरोप/रेडियो लिबर्टी की मूल कंपनी यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन के एक बयान के अनुसार, यह एजेंसी (वॉयस ऑफ अमेरिका) अमेरिकी करदाताओं पर बहुत बड़ा बोझ है। जिन अन्य सरकारी कार्यालयों को बंद किया गया है, उनमें फेडरल मीडिएशन एंड कॉन्सिलेशन सर्विस, यूएस एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया, द वुडरो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्कॉलर्स, द इंस्टीट्यूट ऑफ म्यूजियम एंड लाइब्रेरी सर्विस, यूएस इंटरएजेंसी काउंसिल ऑन होमलेसनेस, द कम्युनिटी डेवलेपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस फंड और माइनॉरिटी बिजनेस डेवलेपमेंट एजेंसी शामिल हैं।
अमेरिका की वैश्विक छवि को हो सकता है नुकसान
वॉयस ऑफ अमेरिका की शुरुआत साल 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी प्रोपेगेंडा का मुकाबला करने के लिए की गई थी। उस समय अमेरिका ने यूरोप में अपने प्रसारण शुरू किए थे, ताकि वहां के लोगों को निष्पक्ष और सटीक जानकारी दी जा सके। तब से लेकर अब तक, VOA दुनिया भर में लोकतंत्र और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। यह समाचार एजेंसी अमेरिका की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर पड़ सकता है, क्योंकि VOA दुनियाभर के कई देशों में स्वतंत्र पत्रकारिता का एक प्रमुख स्त्रोत रहा है। अमेरिका के विदेश नीति के विशेषज्ञों का मानना है कि VOA को बंद करने से अमेरिका का वैश्विक प्रभाव कमजोर हो सकता है।