अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर बयान दिया है। उनका कहना है कि एशिया के पड़ोसी एक बहुत बड़ी समस्या का सामना कर रहे हैं और अमेरिका उनकी मदद करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने मध्यस्थता करने के प्रस्ताव को नहीं दोहराया। इसे चीन और भारत दोनों ने ही अस्वीकार कर दिया था।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका उनसे बात कर रहा है। व्हाइट हाउस में चुनावी रैली के दौरान एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने किसी का भी पक्ष नहीं लिया। ट्रंप से जब स्थिति को लेकर उनके विचार पूछे गए तो उन्होंने कहा, ‘यह एक बहुत कठिन परिस्थिति है। हम भारत से बात कर रहे हैं। हम चीन से बात कर रहे हैं। उनके सामने एक बड़ी समस्या आ गई है। वहां उनके बीच टकराव है। हमें देखना होगा कि आगे क्या होता है। हम उनकी मदद करने की कोशिश करेंगे।’
बीते कुछ दिन से पूरा ट्रंप प्रशासन पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय क्षेत्र में चीन की सेना की अवैध घुसपैठ के मामले में भारत के पक्ष में खड़ा नजर आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में लद्दाख की गलवां घाटी में चीनी सेना की घुसपैठ के बाद दोनों ओर के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे।
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अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक इस झड़प के दौरान भारतीय जवानों ने चीन के 35 से अधिक सैनिकों को मार दिया। अमेरिका ने चीन पर भारत समेत अन्य पड़ोसियों के साथ सीमा पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि चीन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से लड़ रहे इन देशों के वर्तमान हालात का फायदा उठाना चाहता है।
इससे पहले 28 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत और चीन को मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दिया था। केवल इतना ही नहीं उन्होंने दावा किया था कि इसे लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत की है। बाद में भारत सरकार ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया था और साफ कहा था कि ट्रंप और मोदी के बीच ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है। वहीं पिछले साल पुलवामा हमलों के दौरान ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दिया था। इसे भी भारत ने ठुकरा दिया था।