अमेरिका की अहम खुफिया सैन्य जानकारी एक ऐसे ग्रुप चैट में लीक हो गई है, जिसमें पत्रकार भी जुड़े हुए थे। अब इसे लेकर ट्रंप प्रशासन की किरकिरी हो रही है। अभी तक जानकारी लीक करने वाले व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी है।
अमेरिका द्वारा यमन में हूती विद्रोहियों पर लगातार हवाई हमले किए जा रहे हैं। अब खबर आई है कि अमेरिका के हूतियों प हमले की खुफिया योजना पहले ही लीक हो चुकी है। दरअसल एक सुरक्षित एप के ग्रुप चैट में इस गुप्त योजना को साझा किया गया था। इस ग्रुप में अमेरिकी सरकार के शीर्ष अधिकारियों के साथ ही एक अमेरिकी पत्रिका के संपादक भी जुड़े हुए थे। जैसे ही ये योजना ग्रुप में साझा हुई, संपादक ने अपनी मैग्जीन में इसे लेकर खबर छाप दी। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि उस जानकारी को किसने साझा किया।
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यमन मे ंहूतियों पर हमले की योजना हुई लीक
ग्रुप चैट में जो खुफिया जानकारी साझा की गई है, उसमें यमन में हूतियों पर हमले की संचालनात्मक जानकारी, जिन लक्ष्यों को निशाना बनाया जाना है, उनकी जानकारी, हथियार कौन से इस्तेमाल होंगे और हमले किस तरह से किए जाएंगे, इसकी भी पूरी जानकारी दी गई थी। गौरतलब है कि इस जानकारी के एक सुरक्षित एप के ग्रुप चैट में साझा किए जाने के दो घंटे बाद ही 15 मार्च को अमेरिका ने यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए थे। राष्ट्रपति ट्रंप से जब इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से इनकार कर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज पर उठे सवाल
अमेरिका की सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि शीर्ष नेतृत्व वाली ग्रुप चैट में एक पत्रकार को कैसे और किसने जोड़ा। बता दें कि इस ग्रुप चैट में अमेरिका के रक्षा मंत्री के साथ ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, खुफिया विभाग की निदेशक तुलसी गबार्ड शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि सिग्नल एप की ग्रुप चैट में शामिल होने के लिए पत्रकार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने आमंत्रित किया था। माइक वाल्ट्ज खुद इस ग्रुप चैट से जुड़े हुए हैं। इसे लेकर ट्रंप प्रशासन की किरकिरी हो रही है और सवाल उठ रहे हैं कि एक गुप्त और अहम जानकारी इस तरह ग्रुप चैट में क्यों साझा की गई?