अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके सभी टैक्स व वित्तीय रिकॉर्ड को आपराधिक जांच का हिस्सा घोषित कर दिया। कंजरवेटिव चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट की खंडपीठ ने 7-2 से दिए फैसले में हालांकि सिर्फ अभियोजन पक्ष को इन रिकॉर्ड की जांच की अनुमति दी है। आदेश के मुताबिक डेमोक्रेटिक नेतृत्व वाली कांग्रेस ट्रंप के दस्तावेजों को हासिल नहीं कर सकेगी।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि ट्रंप ने अपने संबंधों को छिपाने के लिए कई गुप्त भुगतान किए। कोर्ट का फैसला उन भुगतानों से जुड़े दस्तावेजों के लिए है। आदेश में कहा गया कि लंबे समय से ट्रंप के लेनदेन का लेखा-जोखा रखने वाली अकाउंटिंग फर्म एलएलपी को उनके सभी वित्तीय रिकॉर्ड जांच के लिए ग्रांड ज्यूरी के समक्ष रखने होंगे। अभियोजन पक्ष इन दस्तावेजों को देख सकता है।
मामले की सुनवाई निचले अदालत में होगी। खंडपीठ ने इस फैसले के दूसरे हिस्से में ट्रंप को थोड़ी राहत देते हुए इन दस्तावेजों को तीनों हाउस कमेटी द्वारा प्राप्त करने पर रोक लगा दी। दोनों ही फैसलों में रॉबर्ट के पक्ष में चार लिबरल और ट्रंप के साथ दो कंजरवेटिव जज जस्टिस ब्रेट कवैनॉ और नील गोरसच थे। फैसले के बाद मैनहैटन के डेमोक्रेट जिला अटॉर्नी साईरस वांस ने कहा, यह बड़ी जीत है। आज स्पष्ट हो गया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। फिर चाहे वह राष्ट्रपति खुद क्यों न हों।
पिछली सरकारों को कोर्ट ने खूब बचाया : ट्रंप
ट्रंप ने फैसला आने के ठीक बाद ट्वीट किया, अतीत में कोर्ट ने सरकारों को खूब बचाया, लेकिन मेरे मामले में नहीं। अब ऐसे फैसले दिए जा रहे हैं। इससे पहले की सरकारों में फर्जीवाड़े के सभी मामलों में फैसला सरकार के पक्ष में आया। पिछली सरकारों ने मेरे चुनाव प्रचार अभियान की जासूसी कराई।
अमेरिका के इतिहास में यह सबसे बड़ा राजनीतिक अपराध था, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मैंने राष्ट्रपति रहते देश के लिए साढ़े तीन साल में सर्वाधिक काम किया और मुझे तोहफे में यह मिला। कोर्ट ने मेरे खिलाफ सुनवाई निचली अदालत में करने का फैसला दियौ। मुझे न्यूयॉर्क में पेश होना होगा।