ट्रंप ने जिन देशों के लोगों के अमेरिका आने पर रोक लगाई है, उनमें अफगानिस्तान, बर्मा, चाड, कांगो गणराज्य, इक्वेटोरियल गिनी, इरिट्रिया, हैती, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन शामिल हैं। इसके अलावा, सात राष्ट्र के लोगों की एंट्री भी बैन की गई है। इन देशों में बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला शामिल हैं। इन सात देशों के उन लोगों पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं जो अमेरिका से बाहर हैं और जिनके पास वैध वीजा नहीं है।
सभी अमेरिकी राजनयिक मिशनों को इस बारे में शुक्रवार को दिशा-निर्देश दे दिए गए थे। इन नए प्रतिबंध से सूची में शामिल देशों के लोगों को पहले जारी किए गए वीजा रद्द नहीं होंगे। हालांकि, जब तक कोई आवेदक प्रतिबंध से छूट के लिए तय मानदंडों को पूरा नहीं करता, तब तक उसका आवेदन सोमवार से अस्वीकार कर दिया जाएगा।
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पहले कार्यकाल में भी सात मुस्लिम देशों पर लगाया था प्रतिबंध
अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने जनवरी 2017 में भी एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें सात मुस्लिम देशों के नागरिकों पर अमेरिका की यात्रा करने पर प्रतिबंध लगाया गया था। इन देशों में इराक, सीरिया, ईरान, सूडान, लीबिया, सोमालिया और यमन थे।
2017 में ट्रंप के आदेश के बाद परेशान हुए थे मुस्लिम देशों के लोग
2017 में ट्रंप के इस आदेश के बाद इन मुस्लिम देशों के छात्र, शिक्षक, व्यापारी, टूरिस्ट और परिवार से मिलने वाले लोग परेशान हुए थे। कुछ यात्रियों को या तो अमेरिका आने वाली उड़ानों पर चढ़ने से रोक दिया गया था या फिर उन्हें उतरने के बाद अमेरिकी हवाई अड्डों पर हिरासत में ले लिया गया था। ट्रंप के इस आदेश को 'मुस्लिम प्रतिबंध' भी कहा गया था। बहुत से लोगों ने इसका विरोध किया और अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2018 में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने इसका एक संशोधित रूप मंजूर कर लिया।
ट्रंप के प्रतिबंध से इन देशों के यात्री और अप्रवासी हुए थे प्रभावित
उस दौरान ट्रंप के प्रतिबंध से ईरान, सोमालिया, यमन, सीरिया और लीबिया के विभिन्न श्रेणियों के यात्री और अप्रवासी प्रभावित हुए। इसके अलावा, उत्तर कोरिया और कुछ वेनेजुएला के सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों पर भी इस प्रतिबंध का प्रभाव हुआ।
ट्रंप के नए प्रतिबंध में भी कई मुस्लिम देश शामिल
अब नए प्रतिबंध में भी ट्रंप ने कई मुस्लिम देशों को शामिल किया है। ट्रंप ने इस प्रतिबंध का हमेशा यह तर्क देकर बचाव किया कि इसका उद्देश्य देश की रक्षा करना था। यह मुस्लिम विरोधी पूर्वाग्रह पर आधारित नहीं था। हालांकि, ट्रंप ने व्हाइट हाउस के लिए अपने पहले अभियान के दौरान मुसलमानों पर खुले तौर पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था।
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