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'ईरान पर दोबारा हमला संभव है': ट्रंप ने किया बड़ा इशारा, अराघची बोले- विनाशकारी युद्ध के लिए तैयार

Mon, 28 Sep 2026 07:30 AM IST
देवेश त्रिपाठी एएनआई, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को जल्द समाप्त करने और युद्ध में जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि संघर्ष खत्म होने के बाद तेल कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है और मध्यावधि चुनाव से पहले नए सैन्य हमले की संभावना को भी खारिज नहीं किया।
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पश्चिम एशिया संघर्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर दावा किया है कि अमेरिका यह युद्ध बहुत जल्द जीत लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर नए सैन्य हमले की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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ट्रंप ने रविवार को स्थानीय समयानुसार पीजीए टूर प्रेसिडेंट्स कप से इतर फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि संघर्ष खत्म होते ही वैश्विक तेल कीमतों में बड़ी गिरावट आ सकती है। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है कि हम यह युद्ध बहुत जल्द जीतने जा रहे हैं और जैसे ही हम इसे जीतेंगे, तेल की कीमत बहुत नीचे चली जाएगी, उतनी ही जितनी युद्ध से पहले थी।"

क्या ईरान पर फिर से हमला करेगा अमेरिका?
जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा गया कि क्या आगामी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका दोबारा सैन्य हमले कर सकता है, तो उन्होंने इस संभावना को खारिज नहीं किया। उन्होंने कहा, "मैं ऐसा नहीं कहना चाहता। मेरा मतलब है कि यह संभव है, लेकिन मैं बस यह नहीं कहना चाहता।"
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ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न करे। उन्होंने कहा, "और मुख्य बात यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होगा।" उन्होंने परमाणु प्रतिरोध को पूरे मामले के लिए महत्वपूर्ण बताया।

सैन्य और आर्थिक दबाव दोनों पर जीत का दावा
'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' और यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिका सैन्य दबाव या आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए ईरान के खिलाफ आगे बढ़ रहा है, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका दोनों मोर्चों पर प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हम दोनों तरीकों से जीतेंगे। सैन्य दृष्टिकोण से तो हम वास्तव में पहले ही जीत चुके हैं।" साथ ही उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि सैन्य कार्रवाई रुक गई है।

ईरान की अर्थव्यवस्था को लेकर ट्रंप का दावा
ट्रंप ने ईरान पर आर्थिक दबाव के असर का जिक्र करते हुए दावा किया कि देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो गई है। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से बहुत बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं। अगर आप उनकी अर्थव्यवस्था को देखें, तो वह खत्म हो चुकी है। उनके पास कोई अर्थव्यवस्था नहीं है।"

ईरानी मुद्रा की स्थिति और महंगाई का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि वहां मुद्रा का मूल्य लगभग खत्म हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान में महंगाई करीब 300 प्रतिशत तक पहुंच गई है और उन्होंने सुबह तक यह आंकड़ा 318 प्रतिशत सुने जाने की बात कही। ट्रंप ने कहा, "300 प्रतिशत, यानी उनकी मुद्रा खत्म हो चुकी है, उनकी अर्थव्यवस्था खत्म हो चुकी है और उनकी सेना खत्म हो चुकी है। वे मुश्किल में हैं।"

ईरानी विदेश मंत्री ने दी विनाशकारी युद्ध की चेतावनी
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ संघर्ष को लेकर कहा कि उनका देश किसी भी नए हमले का सामना करने के लिए तैयार है। एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम "मीट द प्रेस" में उन्होंने कहा कि ईरान जरूरत पड़ने पर "डूम्सडे वॉर" यानी बेहद विनाशकारी युद्ध के लिए भी तैयार है।

अराघची ने कहा, "हम युद्ध दोबारा शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हम किसी भी नए आक्रमण के सामने मजबूती से खड़े रहेंगे, भले ही यह डूम्सडे वॉर तक पहुंच जाए। हमें अमेरिका के मध्यावधि चुनावों की परवाह नहीं है। हमें अपने राष्ट्रीय हितों की परवाह है। साथ ही, हम कूटनीति के लिए तैयार हैं। यह राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर है कि वह क्या चुनते हैं।"

ट्रंप ने खारिज किया ईरान का प्रस्ताव
अराघची ने कहा कि ट्रंप की ओर से ईरान के प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज किए जाने की जानकारी उन्हें आधिकारिक राजनयिक माध्यमों से नहीं दी गई है। उन्होंने दोहराया कि ईरान संघर्ष समाप्त करने के लिए बातचीत के तहत समुद्री मार्ग को फिर से खोलने के लिए तैयार है।

ईरान ने रखी धन और तेल बिक्री की शर्त
अराघची ने कहा, "हम चाहते हैं कि हमारा पैसा और हमारी संपत्तियां, जिन्हें अवैध रूप से रोक दिया गया है, उन्हें जारी किया जाए। हम अपना तेल बेचने में सक्षम होना चाहते हैं।" उन्होंने कहा कि ये शर्तें जून में हुए एक समझौता ज्ञापन यानी MoU में शामिल थीं। यह समझौता अस्थायी युद्धविराम के लिए हुआ था, लेकिन इसके कुछ समय बाद दोनों पक्षों की ओर से हुए हमलों के बाद यह खत्म हो गया।

अराघची ने कहा, "अगर आप हमसे पूछें तो कूटनीति में वापस जाने का कोई कारण नहीं है। लेकिन मैं अभी भी कूटनीति की कोशिश कर रहा हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि हमें शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए।"
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