अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने एक तरफ किसी भी बड़े सैन्य टकराव के लिए तैयार रहने का कड़ा संदेश दिया है, तो दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता भी खुला रखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश अमेरिका के साथ ऐसी लड़ाई के लिए भी तैयार है, जिसे उन्होंने कयामत की जंग कहा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान शांति की किसी भी संभावना को खत्म नहीं करना चाहता। अराघची ने यह बयान संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के बाद एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम में दिया। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और साथ ही किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए भी तैयार है। उनके अनुसार तेहरान शांति का कोई अवसर गंवाना नहीं चाहता।
होर्मुज को लेकर बातचीत में गतिरोध
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। फारस की खाड़ी और अरब सागर के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ईरान ने संघर्ष के दौरान इस मार्ग से तेल और गैस की आवाजाही को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।अराघची ने शुक्रवार को प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिकी प्रशासन ईरान की शर्तें स्वीकार करता है तो तेहरान 7 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता शुरू करने पर सहमत हो सकता है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर शुरू होने की संभावना है। हालांकि यह बात अमेरिकी सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं हुई है।अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइकल वॉल्ट्ज ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसे ऐसा प्रयास बताया जिसे ईरान पहले से जानता था कि अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार हासिल करने की संभावना को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति सभी विकल्प खुले रखेंगे।
ईरान की तीन प्रमुख शर्तें
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने के लिए कई शर्तें रखी हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई के अनुसार इनमें अमेरिका की सैन्य कार्रवाई रोकना, नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना और ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करना शामिल है।अराघची ने कहा कि मध्यस्थों के साथ हुई बैठकों में ईरान ने अपनी शर्तें स्पष्ट रूप से रखी हैं और इन शर्तों को अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया गया है। हालांकि उनके अनुसार अभी तक मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से तेहरान को कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है।ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इस गतिरोध को केवल बातचीत के जरिए ही समाप्त किया जा सकता है।
ईरानी सेना ने भी दिया कड़ा संदेश
कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावना के बीच ईरानी सैन्य नेतृत्व की भाषा काफी आक्रामक बनी हुई है। ईरानी स्टूडेंट न्यूज एजेंसी के अनुसार ईरानी सेना के कमांडर-इन- चीफ अमीर हातमी ने कहा कि युद्ध समाप्त नहीं हुआ है।उन्होंने दावा किया कि ईरान ने जीत हासिल की है, लेकिन अब इस स्थिति को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को आगे भी संभावित हमलों का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
ईरान ने अमेरिकी अंडरवाटर ड्रोन पकड़ने का किया दावा
इसी बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी की नौसेना ने रविवार को एक अमेरिकी स्वायत्त अंडरवाटर वाहन को पकड़ने का दावा किया है।ईरान की सरकारी समर्थक तस्नीम न्यूज एजेंसी ने आईआरजीसी के हवाले से कहा कि ईरानी नौसेना ने अमेरिका के एक अत्याधुनिक मानवरहित अंडरवाटर वाहन को कब्जे में लिया है। ईरान ने इसकी पहचान रेमस 600 मानवरहित अंडरवाटर वाहन के रूप में की है।ईरानी पक्ष के अनुसार वाहन को तकनीकी विशेषज्ञों के हवाले कर दिया गया है ताकि उसमें मौजूद डेटा को हासिल किया जा सके। आईआरजीसी ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अनधिकृत आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस संबंध में तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
दुनिया के तेल बाजार पर सीधा असर
अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा की आवाजाही प्रभावित होने के कारण वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है। तेल की आपूर्ति में किसी भी बड़े व्यवधान का असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों से लेकर परिवहन लागत और महंगाई तक पर पड़ सकता है।संघर्ष के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया और दुनिया के कई हिस्सों में महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई। हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की खबरों के बाद सप्ताह के अंत में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट भी दर्ज की गई।
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भविष्य की संभावना
फिलहाल संकट का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए अपनी शर्तों पर कायम है, जबकि अमेरिका ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है। दूसरी तरफ ईरान बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद करने के बजाय मध्यस्थों के जरिए संपर्क बनाए हुए है।इसका अर्थ है कि आने वाले दिनों में घटनाक्रम दो समानांतर रास्तों पर आगे बढ़ सकता है।एक तरफ सैन्य टकराव का खतरा और दूसरी तरफ कूटनीतिक समाधान की कोशिश। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति इस पूरे संकट का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेगी, क्योंकि वहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर मध्य पूर्व से निकलने वाली ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।