अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदूषण के मुद्दे पर एक बार फिर भारत, चीन और रूस की आलोचना की। उन्होंने कहा, तीनों देश अपने उद्योगों से निकले धुएं के निपटारे के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं और समुद्र के जरिए इन देशों का कचरा लॉस एंजेलिस आकर तैरता रहता है। जलवायु परिवर्तन को जटिल मुद्दा बताते हुए ट्रंप ने कहा कि कोई माने या ना माने वह कई मायनों में पर्यावरणप्रेमी हैं। मैं पूरी धरती पर साफ हवा और पानी चाहता हूं।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एकतरफा, भयावह और आर्थिक तौर पर नुकसानदायक पेरिस समझौते से बाहर हो गया, जिसमें कहा गया था कि ‘तीन सालों के भीतर अपना बिजनेस बंद करो’, ‘खनन न करो’, ‘हमें उर्जा की जरूरत नहीं है’। भयावह पेरिस समझौते से अमेरिकी नौकरियां खत्म हो रही थीं और विदेशी प्रदूषकों को संरक्षण मिला हुआ था।
भारत को हमें देने पड़ते पैसे, अमेरिका भी विकासशील
ट्रंप ने कहा, पेरिस जलवायु समझौता अमेरिका के लिए मुसीबत था और इससे अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान होता। यह हमारे साथ अन्याय था। चीन को 2030 तक छूट मिली थी जबकि भारत को हमें पैसे देने पड़ते क्योंकि वह विकासशील देश हैं। ट्रंप ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका भी विकासशील देश ही है।
पेड़ों का सफाया कर रहे ये देश
ट्रंप ने कहा, अमेरिका के पास तुलनात्मक रूप से कम जमीन है। आप चीन, भारत और रूस से तुलना करें तो पाएंगे कि ये देश अपने प्रदूषण के निपटारे के लिए कुछ भी नहीं कर रहे हैं, अपने देश में पेड़ों का सफाया कर रहे हैं और सारा कचरा समुद्र में बहा दे रहे हैं।