अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बीच अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया कि अगर वह भी चुनाव में उम्मीदवार होते तो उनकी पार्टी को बड़ी जीत मिलती।ट्रंप ने लिखा, "मैं चुनाव में उम्मीदवार नहीं था। अगर मैं उम्मीदवार होता तो हम बहुत बड़े अंतर से जीतते।"
ट्रंप बोले- अब राजनीतिक विश्लेषक बनूंगा
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा "मैं एक राजनीतिक विश्लेषक बनने जा रहा हूं। अच्छे और बुरे, दोनों पहलुओं से उन कारणों पर चर्चा करूंगा, जिनकी वजह से ये उम्मीदवार जीते या हारे।" इसके अलावा ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में 'VETO' लिखी लाल टोपी की तस्वीर भी साझा की।
ट्रंप ने माना- ईरान युद्ध की वजह से रिपब्लिकन चुनाव में हारे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने माना है कि ईरान के साथ युद्ध का असर मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ा। इन चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, में उनकी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के बाद इससे ट्रंप के विधायी एजेंडे को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को फोन पर दिए एक इंटरव्यू में कहा, मुझे लगता है कि इसका एक कारण ईरान था। हालांकि, लोगों ने ईरान को लेकर मेरे किए गए कामों के महत्व को भी समझा। उन्होंने कहा कि संभव है कि मतदाता पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के तत्काल प्रभावों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। ट्रंप ने यह भी कहा कि कैबिनेट में बदलाव करने की उनकी संभावना नहीं है।
चुनाव के नतीजे स्वीकार करने को तैयार ट्रंप
ट्रंप ने मंगलवार रात द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि वह मध्यावधि चुनाव के नतीजों को स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा "मैं इन नतीजों को स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।" उन्होंने कहा कि उनकी सरकार डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेगी और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।
डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करने की जताई इच्छा
डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा कि वह डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के साथ काम करने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा "हम डेमोक्रेट्स के साथ काम करेंगे और उनके साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करते हैं। संभव है कि हम कोई रास्ता निकाल लें।"
संसद में बढ़ेगी ट्रंप की मुश्किल
गौरतलब है कि अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होते हैं। इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की करीब एक तिहाई सीटों पर चुनाव होता है। इन नतीजों से तय होता है कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का बहुमत रहेगा।
अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो वे कई संसदीय समितियों का नियंत्रण संभाल लेंगे। इन समितियों के जरिए ट्रंप सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए जा सकेंगे। अधिकारी पूछताछ के लिए बुलाए जा सकेंगे। दस्तावेज मांगे जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर समन भी जारी किए जा सकेंगे।
सीनेट में बहुमत खोने से ट्रंप को हो सकते हैं ये बड़े नुकसान
ट्रंप प्रशासन के खिलाफ जांच का दबाव बढ़ेगा
सीनेट की समितियों का नियंत्रण विपक्ष के हाथ में जाने से ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच बढ़ सकती है। डेमोक्रेटिक सांसद इन मुद्दों पर सुनवाई और जांच करा सकते हैं:
- ट्रंप प्रशासन की नीतियां और सरकारी फैसले।
- इमिग्रेशन और निर्वासन से जुड़े अभियान।
- सरकारी खर्च और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप।
ट्रंप के विधायी एजेंडे पर लग सकता है ब्रेक
ट्रंप प्रशासन अपने नए कानूनों और नीतियों को आसानी से संसद से पारित नहीं करा पाएगा। टैक्स, इमिग्रेशन, व्यापार और सरकारी खर्च से जुड़े प्रस्तावों पर ट्रंप को विपक्ष के साथ की जरूरत होगी।
ट्रंप पर मंडरा सकता है महाभियोग का खतरा
अगर ट्रंप सीनेट में बहुमत खो देते हैं तो उनके खिलाफ डेमोक्रेट्स महाभियोग ला सकते हैं। हालांकि महाभियोग के लिए डेमोक्रेट्स को दो तिहाई बहुमत की जरूरत होगी।
जजों और बड़े अधिकारियों की नियुक्तियां रोक सकते हैं डेमोक्रेट्स
अमेरिकी संविधान के तहत राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के जजों, संघीय अदालतों के न्यायाधीशों, राजदूतों और कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को नामित करते हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति के लिए सीनेट की मंजूरी जरूरी होती है। अगर डेमोक्रेट सीनेट में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो वे ट्रंप के नामित जजों की नियुक्ति रोक सकते हैं। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्तियों में देरी कर सकते हैं।
सरकारी बजट और नीतियों पर टकराव
अगर ट्रंप बहुतम खो देते हैं तो उन्हें ईरान युद्ध और निर्वासन के लिए दी जा रही फंडिंग में कटौती करनी पड़ सकती है।