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'ईरान पर होगा सबसे बड़ा हमला': अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की खुली चेतावनी, क्या फिर शुरु होगा विनाशकारी युद्ध?

Thu, 23 Jul 2026 10:58 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, वाशिंगटन।

सार

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नजर आ रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने अब तक के सबसे भीषण सैन्य हमले के साफ संकेत दे दिए हैं। अगर ट्रंप यह बड़ा फैसला लेते हैं, तो आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया  एक बहुत बड़े और भयानक युद्ध की चपेट में आ सकता है।
 
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के बादल एक बार फिर काले और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर एक और बेहद बड़ा सैन्य हमला करने का मन बना रहे हैं। ट्रंप ने खुद इसका खुलासा एक हालिया इंटरव्यू में किया है। उन्होंने साफ कहा कि यह हमला इस साल की शुरुआत में चलाए गए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' से भी कहीं ज्यादा भयानक और बड़ा हो सकता है।
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क्या ईरान को सबक सिखाने की पूरी तैयारी है?
'एक्सियोस' को दिए इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े हमले के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि आखिरी और आधिकारिक फैसला लेना अभी बाकी है। दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सेना को अभी तक कोई नई आधिकारिक गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि मैं एक बहुत बड़े हमले पर विचार कर रहा हूं। यह पहले के किसी भी हमले से बहुत बड़ा होगा। मैं फैसला लेने के बहुत करीब हूं। हमारी तैयारियां पूरी तरह से पुख्ता हैं।

यह भी पढ़ें: Saudi Nuclear Deal: सऊदी अरब के परमाणु समझौते में हुई इस्राइल की एंट्री, ट्रंप ने कौन सी नई शर्तें रख दीं?
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क्या फिर शुरू होगा विनाशकारी युद्ध का दौर?
ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इस्राइली सेना तुरंत इस मिशन में शामिल हो सकती है। लेकिन अमेरिका को ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए किसी दूसरे देश की मदद की जरूरत नहीं है। राजनीतिक जानकारों और मध्यस्थों के अनुसार, ट्रंप का मानना है कि ईरानी अधिकारियों को जब तक पूरी तरह से दर्द महसूस नहीं होगा, तब तक वे झुकेंगे नहीं। ईरान ने बातचीत की मेज पर दिए गए ताजा समझौते के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। मध्यस्थता में जुटे सूत्रों का कहना है कि वे लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिल रहा है।
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तनाव के पीछे क्या हैं पांच बड़ी बातें?
  • ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर: इसी साल फरवरी में अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं।
  • समझौता नाकाम: पाकिस्तान की मध्यस्थता से पिछले महीने शांति समझौता हुआ था, लेकिन होर्मुज में फिर से झड़पें शुरू हो गईं।
  • हुती विद्रोहियों को सीधा अल्टीमेटम: ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट चेतावनी दी कि लाल सागर में समुद्री जहाजों पर होने वाले हर हुती हमले के लिए ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा।
  • ईरान पर भारी सैन्य दंड: ट्रंप ने कहा कि ईरान और हुती विद्रोहियों, दोनों को ही इसकी बहुत बड़ी सैन्य सजा भुगतनी पड़ेगी।
  • कूटनीति से दूर होता समाधान: ईरान का शांति प्रस्ताव ठुकराना अब सीधे तौर पर सैन्य टकराव को न्योता दे रहा है।
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