अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से सीजफायर लागू होने का दावा किया है। वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि अगर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 60 दिनों के पूर्ण युद्धविराम पर सहमत होते हैं, तो यूक्रेन में चुनाव कराने की व्यवस्था की जा सकती है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा, "तत्काल प्रभाव से रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में ऊर्जा सीजफायर लागू है। दोनों पक्ष सहमत हो गए हैं। इसका उल्लंघन न करें! इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।" हालांकि, बयान में इस सीजफायर की शर्तों और उसके क्रियान्वयन से जुड़ी जानकारी नहीं दी गई है।
जेलेंस्की ने दिया था 60 दिन के युद्धविराम का प्रस्ताव
ट्रंप के एलान से पहले वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी समाचार चैनल एबीसी के कार्यक्रम 'दिस वीक' से बातचीत में कहा था कि अगर पुतिन दो महीने यानी 60 दिनों के पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हो जाएं, तो यूक्रेन चुनाव कराने की व्यवस्था कर सकता है। उन्होंने कहा, "कृपया पुतिन से कहिए कि हमें दो महीने, 60 दिनों का पूर्ण युद्धविराम दें। 60 दिन और हम चुनाव करा देंगे।"
जेलेंस्की का यह बयान ट्रंप की उस आलोचना के जवाब में आया, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की मांग की थी। जेलेंस्की ने कहा कि युद्धविराम से चुनाव कराने के लिए जरूरी परिस्थितियां तैयार हो सकती हैं। यूक्रेन में फिलहाल मार्शल लॉ लागू है, जिसके तहत चुनाव कराने पर रोक है। यूक्रेनी नेतृत्व का कहना रहा है कि युद्ध के दौरान देशव्यापी चुनाव कराने में सुरक्षा और व्यवस्थागत चुनौतियां हैं।
ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की भी पेशकश
जेलेंस्की ने कहा था कि यूक्रेन रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए रूस को भी यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले बंद करने होंगे। उन्होंने कहा था, "यूरोप में युद्ध का असली कारण रूस है और केवल रूस ही इसके लिए जिम्मेदार है।" जेलेंस्की ने यह भी कहा कि ऊर्जा ढांचे पर हमले आज से ही रोके जा सकते हैं, लेकिन पुतिन ऐसा नहीं करना चाहते। उन्होंने किसी भी समझौते के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी की जरूरत पर जोर दिया।
यूक्रेन रूसी तेल ढांचे को निशाना बनाकर मॉस्को की ऊर्जा से होने वाली कमाई और उसके युद्ध प्रयासों पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। कीव का कहना है कि एकतरफा हमले रोकने से रूस पर दबाव कम हो सकता है, जबकि यूक्रेन के बिजली संयंत्रों और अन्य ऊर्जा ठिकानों को हमलों से सुरक्षा नहीं मिलेगी।
रूसी डीजल आपूर्ति समझौते पर भी विवाद
रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर ट्रंप के समझौते पर भी विवाद सामने आया है। जेलेंस्की ने शनिवार को इस व्यवस्था की आलोचना करते हुए चेतावनी दी थी कि इससे मॉस्को का हौसला बढ़ सकता है। ईरान से जुड़े युद्ध के फरवरी में शुरू होने के बाद से वैश्विक डीजल कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। इससे ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी पर दबाव बढ़ा है। अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन गई हैं।