भारत के बार-बार नकारने के बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बाज नहीं आ रहे हैं। वे बार-बार बिना किसी सबूत के भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने का श्रेय ले रहे हैं। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से साफ-साफ इनकार करने के बावजूद ट्रंप अपनी जुबान पर काबू नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने फिर दोहराया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के बाद कई बातों को सुलझाया, जो आगे चलकर परमाणु संघर्ष में बदल सकती थीं।
शुक्रवार को व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच हालिया संघर्ष के दौरान पांच या छह विमान मार गिराए गए। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान दोनों देशों में से किसी एक के गिरे थे या वह दोनों पक्षों के संयुक्त नुकसान की बात कर रहे थे। इन सब के बीच नई दिल्ली यह कहता रहा है कि भारत और पाकिस्तान ने अमेरिका की मध्यस्थता के बिना अपनी सेनाओं के बीच सीधी बातचीत के बाद अपनी सैन्य कार्रवाई रोक दी थी।
कहां, कब और क्यों लिया श्रेय?
ट्रंप ने यह टिप्पणी अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान के साथ शांति समझौते के बाद की। त्रिपक्षीय हस्ताक्षर समारोह के दौरान अमेरिका की मध्यस्थता में यह शांति समझौता हुआ। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में मेरी सर्वोच्च आकांक्षा दुनिया में शांति और स्थिरता लाना है। आज का यह हस्ताक्षर भारत और पाकिस्तान के साथ हमारी सफलता के बाद हुआ है। वे खतरनाक तरीके से काम कर रहे थे, वे बड़े पैमाने पर संघर्ष का हिस्सा बन चुके थे और वे दो महान देश हैं, जो एक ऐसे भीषण संघर्ष से ठीक पहले एक साथ आए, जो संभवतः एक परमाणु संघर्ष होता।
व्यापार के माध्यम से संघर्षों का निपटारा?
व्यापार के माध्यम से संघर्षों का निपटारा करने को लेकर ट्रंप ने कहा, 'मैंने भारत और पाकिस्तान के साथ मामलों का निपटारा किया। मुझे लगता है कि यह किसी भी अन्य कारण से ज्यादा व्यापार के कारण था। इसी तरह मैं इसमें शामिल हुआ। मैंने कहा कि आप जानते हैं, मैं उन देशों के साथ काम नहीं करना चाहता जो खुद को और शायद दुनिया को उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वे परमाणु राष्ट्र हैं।'