कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला घोड़ा डॉ. पेयो
- फोटो : Jeremy Lempin
फ्रांस के कैलिस अस्पताल में कैंसर से जूझ रहे मरीजों को ‘डॉ. पेयो’ रोज राहत पहुंचाने आते हैं। डॉ. पेयो नाम के इस घोड़े को हसन बूचकोर ने खास तौर पर मरीजों की सेवा के लिए प्रशिक्षित किया है।
कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला घोड़ा डॉ. पेयो
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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वह पैरों से इशारा कर बताता है कि उसे किस मरीज के रूम में जाना है। मरीज के साथ कितनी देर तक रहना है। हसन के मुताबिक, पेयो को पता चल जाता है कि मरीज को कैंसर है या ट्यूमर।
कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला घोड़ा डॉ. पेयो
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मालिक ने घोड़े का नाम पहले पेयो रखा था, लेकिन बाद में मरीजों के असहनीय दर्द को कम करने के चलते पेयो ‘डॉक्टर’ के तौर पर मशहूर हो गया है। पेयाे 15 साल का है।
कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला घोड़ा डॉ. पेयो
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मैटास्टैटिक कैंसर से पीड़ित 24 साल की मारिन से जब उनका बच्चा मिलने के लिए आया तो पेयो को साथ लेकर पहुंचा। दर्द से छटपटा रही मारिन कहती हैं, ‘पेयो और बच्चे को देखकर मेरा दर्द खत्म हो गया। वहीं इसी अस्पताल में 67 साल के डेनियल ने जनवरी में दम तोड़ा। पेयो उनका जिगरी दोस्त बन गया था।
कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला घोड़ा डॉ. पेयो
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टर्मिनल कैंसर से पीड़ित डेनियल की ख्वाहिश थी कि उनके अंतिम संस्कार में पेयो भी शामिल हो। उनके निधन के बाद जब शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था, तब पेयो की आंखें भी नम थीं। पेयो उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल हुआ। ऐसी और भी कई कहानियां हैं।
कैंसर मरीजों का इलाज करने वाला घोड़ा डॉ. पेयो
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हसन ने बताया कि हम दोनों अपना ज्यादातर समय मरीजों के साथ अस्पताल में बिताते हैं। अस्पताल प्रशासन की अनुमति से हम मरीजों तक जाते हैं। उनके साथ वक्त बिताते हैं। मरीज पेयो को दुलार करते हैं। पेयो भी उन्हें उतने ही स्नेह से प्रतिक्रिया देता है। इस तरह उन लोगों की तकलीफ को कुछ देर के लिए ही सही कम कर पाते हैं।