सूर्य को निगल जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा ब्लैक होल मिला है। इसकी दूरी पृथ्वी से करीब 2,000 प्रकाश वर्ष से भी कम दूरी पर है। ‘जीएआईए बीएच3’ नामक ब्लैक होल एक्विला तारामंडल में छिपा है। इसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से 33 गुना ज्यादा बड़ा है। पहली बार तारकीय उत्पत्ति का इतना बड़ा ब्लैक होल आकाशगंगा में खोजा गया है।
अंतरिक्ष में एक असामान्य डगमगाहट का पता लगाने के बाद खगोलविदों ने मिल्की वे आकाशगंगा में ये ब्लैक होल देखा गया। इस प्रकार के ब्लैक होल केवल बहुत दूर की आकाशगंगा में ही खोजे गए हैं। यूरोपियन अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने कहा कि अधिकांश तारकीय-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल पास के तारे से पदार्थ खींच रहे हैं। यह पदार्थ इतनी तेज गति से ब्लैक होल में गिरता है कि गर्म होकर एक्सरे विकिरण छोड़ता है।
एक्विला तारामंडल में हुई खोज
कभी-कभी, ब्लैक होल के पास कोई तारा नहीं होता है। इसका मतलब है कि वे कोई प्रकाश उत्पन्न नहीं करते हैं, जिससे उन्हें पहचानना बेहद मुश्किल हो जाता है। खगोलशास्त्री इन ब्लैक होल को "सुप्त" कहते हैं। ऐसे तारों की खोज करते समय शोधकर्ताओं ने एक्विला तारामंडल में एक पुराने विशाल तारे की खोज की। उन्होंने इसके पथ में डगमगाहट का विस्तार से विश्लेषण किया और पाया कि यह असाधारण रूप से उच्च द्रव्यमान वाले एक निष्क्रिय ब्लैक होल के साथ एक कक्षीय गति में बंद था।
10 लाख सूर्य के बराबर होता है एक सुपरमैसिव ब्लैक होल
आकाशगंगा में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल का द्रव्यमान एक करबी 10 लाख सूर्य के बराबर है। वैज्ञानिकों को इस बात का प्रमाण मिला है कि प्रत्येक बड़ी आकाशगंगा के केंद्र में एक महाविशाल ब्लैक होल होता है। मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र में स्थित सुपरमैसिव ब्लैक होल को सैगिटेरियस ए कहा जाता है। इसका द्रव्यमान लगभग 40 लाख सूर्य के बराबर है और यह एक बहुत बड़ी गेंद के अंदर फिट होगा जो कुछ मिलियन पृथ्वी को समा सकता है।
पृथ्वी का दूसरा करीबी ज्ञात ब्लैक होल...
ईएसए के मुताबिक, तारामंडल में 1,926 प्रकाश वर्ष दूर स्थित होने की वजह से ये पृथ्वी का दूसरा सबसे निकटतम ज्ञात ब्लैक होल बन गया है। धरती के सबसे करीब का पहला ब्लैक होल जीएआईए बीएच1 है, जो 1,500 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और इसका द्रव्यमान सूर्य से 10 गुना अधिक है।