रुचि के हिसाब से बंट जाता है समय
डॉ. केटी बताती हैं कि इस शोध में यह जानने का प्रयास किया गया कि उस वक्त एक मां और बच्चे के बीच वास्तव में क्या चल रहा होता है, जब मां एक ही समय में बच्चे की देखभाल करती है और स्मार्टफोन भी चलाती है। चूंकि, इस प्रयोग के बारे में उन्हें पता नहीं था, इसलिए कुछ माताओं ने अपनी रुचि के हिसाब से बच्चों के साथ समय बिताया तो कुछ ने स्मार्टफोन चलाया तो किसी ने इस दौरान मैग्जीन पढ़े। मां, बच्चों के बीच बातचीत की वीडियो टेपिंग की गई और बाद में फ्रेम-दर-फ्रेम रिकॉर्डिंग की गई।
इन स्तरों पर किया गया अध्ययन
तेल अवीव यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मां और बच्चे की बातचीत को तीन भागों में विभाजित किया।
- सबसे पहले...मां के उस संवाद (मैटरनल लिंग्विस्टिक इनपुट) की जांच की गई, जो वह अपने बच्चे से करती है। पिछले अध्ययनों के मुताबिक, यह बच्चों में भाषा के विकास का एक महत्वपूर्ण कारक है। मां अगर कम बातचीत करती है तो इसका असर बच्चे पर पड़ेगा और भाषा का उतना विकास नहीं होगा।
- इसके बाद उस मां पर अध्ययन किया गया, जो अपने बच्चे के साथ ज्यादा समय व्यतीत करती है। इसमें पता चला कि ऐसे बच्चों में भाषाई और सामाजिक विकास बेहतर होता है।
- आखिर में हमने बच्चे को कुछ भी बोलने पर मां की प्रतिक्रिया की जांच की। उदाहरण के लिए, अगर कोई बच्चा ‘देखो, ट्रक’ कहता है तो ‘हां, यह बहुत अच्छा है’ और ‘सही है’ जैसी मां की दोनों प्रतिक्रियाओं के बीच कोई तुलना नहीं है। इसके बाद अगर वह यह भी कहती है कि ‘यह वही लाल ट्रक है, जिसे आपने कल देखा था।’ इसका मतलब है कि मां बच्चे के साथ ज्यादा बातचीत करती है। इससे वह बच्चा भाषाई, सामाजिक, भावनात्मक रूप से ज्यादा विकासशील होगा।
ऐसे कम होती जाती है बच्चों के साथ बातचीत
डॉ. केटी कहती हैं कि मां और बच्चे की बातचीत की जांच में तीन तत्व सामने आए।
- पहला...बच्चे के साथ खेलने के अलावा मैग्जीन पढ़ने या फोन चलाने की वजह से मां अपने बच्चे से दो-चौथाई तक कम बातचीत करती है।
- दूसरा...स्मार्टफोन पर ज्यादा समय बिताने के कारण मां अपने बच्चे से चार गुना तक कम बात कर पाती है।
- तीसरा...अगर मां फेसबुक ब्राउज करने के साथ बच्चे की किसी बात पर प्रतिक्रिया देती है तो उसकी प्रतिक्रिया की गुणवत्ता खराब होती है।