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पांच साल बाद मां से बात: आंग सान सू की को बेटे से फोन पर बातचीत की मिली इजाजत; क्या जल्द हो पाएगी रिहाई?

Thu, 22 Oct 2026 08:48 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बैंकॉक।

सार

पांच साल से अधिक समय बाद म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की की अपने बेटे से फोन पर बात हुई। बेटे ने उनकी रिहाई की मांग करते हुए समर्थकों से आवाज उठाने की अपील की है। इस बीच, सैन्य सरकार अंतरराष्ट्रीय संबंध सुधारने की कोशिश कर रही है। क्या इन घटनाओं से म्यांमार के राजनीतिक संकट को सुलझाने की कोई राह निकलेगी? पढ़िए इस रिपोर्ट में। 
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किम एरिस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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हिरासत में बंद म्यांमार की पूर्व नेता आंग सान सू की को गुरुवार को पांच साल से अधिक समय बाद पहली बार अपने बेटे किम एरिस से फोन पर बात करने की अनुमति दी गई। उनके बेटे ने अपने फेसबुक पेज पर इस बारे में जानकारी दी।
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सू की फरवरी 2021 से हिरासत में हैं। उस समय सेना ने तख्तापलट कर उनकी चुनी हुई सरकार को हटा दिया था। फिलहाल वह घर में नजरबंद हैं और 18 साल की जेल की सजा काट रही हैं। उन्हें कई आरोपों में दोषी ठहराया गया था। उनके समर्थकों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

पांच साल बाद मां की आवाज सुनकर क्या बोले बेटे?
एरिस ने फेसबुक पर लिखा, आज, मैं पांच साल से अधिक समय बाद आखिरकार अपनी मां, आंग सान सू की से बात कर पाया। उनकी आवाज दोबारा सुनने का मतलब मेरे लिए इतना ज्यादा है कि उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 
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राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने की पुष्टि
म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग के प्रवक्ता खाइंग खाइंग सो ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि एरिस ने अपनी मां से 20 मिनट तक बातचीत की। सू की राजधानी नेपीडॉ में एक अज्ञात स्थान पर घर में नजरबंद हैं। एरिस ने लंदन स्थित म्यांमार के दूतावास से उनसे बात की।

मां के जीवित होने का सबूत क्यों मांग रहे थे एरिस?
सू की के छोटे बेटे एरिस लंदन में रहते हैं। उन्होंने म्यांमार के अन्य लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ ऑनलाइन अभियान चलाया था। इसमें उन्होंने अपनी मां के जीवित और स्वस्थ होने का सबूत देने की मांग की थी। 2021 में सेना के तख्तापलट के बाद से सू की को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। उनकी स्थिति और वह कहां हैं, इसकी जानकारी भी काफी हद तक लोगों से छिपाकर रखी गई है।

(किम एरिस। फोटो: फेसबुक/किम एरिस)


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अगस्त में अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति के एक प्रतिनिधि ने सू की से मुलाकात की थी। फरवरी 2021 में हिरासत में लिए जाने के बाद किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठन के प्रतिनिधि से उनकी मुलाकात का यह पहला ज्ञात मामला था। 

रिहाई के लिए बेटे ने क्या अपील की?
एरिस ने गुरुवार को कहा कि सू की 81 साल की हैं और उन्हें 'अन्यायपूर्ण तरीके से हिरासत में रखा गया है'। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की कि वे उनकी आजादी मिलने तक आवाज उठाते रहें। उन्होंने लिखा, मेरी मां और सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा किया जाना चाहिए। आजादी पर कोई समझौता नहीं हो सकता। किम एरिस सू की के दो बेटों में से एक हैं। उनके पिता ब्रिटेन के शिक्षाविद माइकल एरिस थे, जिनका निधन हो चुका है।

मिन आंग ह्लाइंग ने 2021 में सत्ता पर सेना की ओर से कब्जा करने का नेतृत्व किया था। अब वह म्यांमार का अंतरराष्ट्रीय अलगाव खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। सू की को सत्ता से हटाकर जेल में डालने के बाद देश को अंतरराष्ट्रीय अलगाव का सामना करना पड़ा था। इस साल की शुरुआत में चुनाव कराने के बाद सरकार सामान्य स्थिति लौटने का संदेश देने की कोशिश कर रही है।

आलोचकों ने इस चुनाव को न तो स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष माना। उनका कहना है कि इसका मकसद सत्ता पर सेना की पकड़ मजबूत करना था। इसके बावजूद, मिन आंग ह्लाइंग की सरकार पड़ोसी देशों और यहां तक कि अमेरिका के साथ भी संबंध सुधारने में आगे बढ़ती दिख रही है। अमेरिका म्यांमार की सैन्य सरकार के सबसे कड़े आलोचकों में से एक है। वह देश पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने में भी प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। इस बीच, म्यांमार की सेना लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों और जातीय विद्रोही समूहों के खिलाफ भीषण लड़ाई जारी रखे हुए है।
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किंग चार्ल्स तृतीय ने सू की के लिए क्या भेजा था?
सोमवार को म्यांमार की सेना समर्थित सरकार ने बताया कि उसने ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय की ओर से सू की के लिए भेजी गई दो किताबें उन्हें पहुंचा दी हैं। इसके साथ एक सीलबंद लिफाफा और राजनयिक पत्राचार भी दिया गया। इस घटना और गुरुवार को हुई फोन पर बातचीत की घोषणा को कूटनीतिक मान्यता हासिल करने के लिए सरकार की ओर से चलाए जा रहे मेल-मिलाप के प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है।

रिहाई की मांग क्यों कर रहा अंतरराष्ट्रीय समुदाय?
म्यांमार के सहयोगी देशों सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के सदस्यों ने भी सू की की रिहाई की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने देश के राजनीतिक संकट को सुलझाने के प्रयासों के तहत सू की तक पहुंच बनाने या उनसे बातचीत करने की मांग भी की है। हालांकि, म्यांमार की सरकार ने इन मांगों को खारिज कर दिया है।
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