अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध लगाने की धमकियों के बीच बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि कि उनकी पार्टी कोई "परजीवी" नहीं है ना ही बाढ़ के पानी के साथ उभरी है। भारत से अपने वर्चुअल संबोधन में अंतरिम सरकार को चेताते हुए हसीना ने कहा कि उनकी (अंतरिम सरकार की) हिम्मत मुझे हैरान करती है।
शेख हसीना ने कहा कि अवामी लीग की स्थापना 1948 में तत्कालीन पाकिस्तान में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करने, स्वतंत्रता संग्राम और अंततः 1971 के मुक्ति संग्राम को सुनिश्चित करने के लिए एक अभियान चलाने के लिए की गई थी। शेख मुजीबुर रहमान के नेतृत्व में यह आंदोलन चला। उन्होंने कहा कि जिस देश में वे अब रहते हैं उसका नाम भी बंगबंधु शेख मुजीब ने दिया है। उन्होंने अवामी लीग के संगठनात्मक ढांचे का उपयोग करके बंगाल के लोगों को एकजुट किया और देश को स्वतंत्र बनाया, किसी को भी यह तथ्य नहीं भूलना चाहिए।
संबोधन के दौरान हसीना ने पूछा कि प्रतिबंध की मांग करने वालों के क्या अधिकार हैं? आगे उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर भी तंज कसा। हसीना ने उन्हें फासीवादी करार दिया क्योंकि उन्होंने श्रमिकों, शिक्षकों, छात्रों और अन्य लोगों पर क्रूर कार्रवाई की है जो अपनी सही मांगों के लिए अभियान चलाने की कोशिश कर रहे थे।
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हसीना ने कहा कि लेकिन हमें अब यह हिसाब लगाना होगा कि उनकी शहीदों की सूची में कितने लोग मारे गए और उस सूची से परे उन्होंने अवामी लीग के कार्यकर्ताओं, पुलिसकर्मियों, अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों, श्रमिकों, छात्रों और शिक्षकों में से कितने लोगों को मारा है। हसीना ने कहा कि जब उनकी सरकार सत्ता में थी, तो इस्लामी छात्र शिबिर, दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी के छात्र मोर्चे या बीएनपी की छात्र शाखा छात्र दल जैसे किसी भी विपक्षी खेमे से जुड़े किसी भी छात्र को शिक्षा प्राप्त करने से नहीं रोका गया और कोई भी इससे इनकार नहीं कर सकता। लेकिन आज, अगर किसी छात्र का लीग से कोई संबंध पाया जाता है, तो उसका प्रमाणपत्र रद्द कर दिया जाता है और उसे पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाती है। ऐसे में इस देश में तानाशाह, फासीवादी कौन है और किसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए?
अपने संबोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री ने यूनुस पर तीखा हमला बोला। हसीना उन्हें हड़पने वाला बताया और कहा कि उनके पास देश चलाने के लिए कोई संवैधानिक आधार या जनादेश नहीं है। उन्होंने विदेशों से मिले धन से सुनियोजित योजना के तहत सत्ता संभाली, और आम छात्रों और लोगों को गुमराह किया। लेकिन जिन लोगों ने यूनुस के पैसे से इस योजना को लागू किया है, उनका मुकदमा एक दिन बांग्लादेश की धरती पर जरूर चलेगा। और यूनुस अपने कुकृत्य से कैसे छुटकारा पाएंगे... उनका असली चेहरा अब दुनिया के लोगों के सामने बेनकाब हो चुका है।
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उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने लोगों के सामने अपनी अच्छी छवि खो दी है। अब लोगों को एहसास हो गया है कि वह कितने धोखेबाज, भ्रष्ट और कितना बड़े आतंकवादी हैं।